इतिहास महत्वपूर्ण तथ्य

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history

आर्यन्स का भारत में  आगमन
इंडो आर्यन भाषा बोलने वाले लोग उत्तर- पश्चिमी पहाड़ों से आये थे तथा पंजाब के उत्तर पश्चिम में बस गए तथा बाद में गंगा के मैदानीय इलाकों में जहाँ इन्हे आर्यन्सया इंडो- आर्यन्स के नाम से जाना गया | ये लोग इंडो- ईरानी, इंडो- यूरोपीय या संस्कृत भाषा बोलते थे | ये कहा गया है कि आर्यन्स अल्प्स के पूर्व( यूरेशिया), मध्य एशिया, आर्कटिक क्षेत्र, जर्मनी तथा दक्षिणी रूस में रहे | आर्यन्स भारत में प्रारंभिक वैदिक युग में बसे | इसे सप्तसिन्धु या सात नदियों; झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास, सतलुज, सिंधु और सरस्वती की धरती के नाम से जाना जाता है |
अशोक द ग्रेट( 268- 232 B .C.)
अशोक बिंदुसार का बेटा था | अपने पिता के शासन के दौरान वह तक्षिला और उज्जैन का राज्यपाल था | अपने भाइयों को सफलतापूर्वक हराने के बाद अशोक 268 B . C . के लगभग सिंहासन पर बैठा | अशोक के राजगद्दी पर पद ग्रहण(273 B . C .) तथा उसके वास्तविक राज्याभिषेक( 268 B .C.) में चार साल का अन्तराल था | अतः, उपलब्ध साक्ष्यों से यह पता चलता है कि बिंदुसार की मृत्यु के बाद राजगद्दी के लिए संघर्ष हुआ था |
दिल्ली सल्तनत: कला, शिक्षा और व्यापार
दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत कला, शिक्षा और व्यापार शैली में एक अद्भुत हिंदू और इस्लामी शैली का मिश्रण दृष्टिगोचर होता है.
दिल्ली सल्तनत: सामाजिक  आर्थिक संरचना
दिल्ली सल्तनत के दौरान व्यापार में काफी वृद्धि हुई थी. मुद्रा के रूप में चांदी का टंका प्रचालन में था.
राजपूत: सामाजिक-सांस्कृतिक  परम्पराएं
राजपूतों की मूल भाषा प्राकृत थी. जोकि थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ क्षेत्रीय भाषाओं से अलग था.
राजपूत काल: महत्वपूर्ण  घटनाक्रम
राजपूत राज्य अपनी वीरता की वजह से भारत में मुस्लिम वर्चस्व के  ख़िलाफ मुख्य बाधा के रूप में विद्यमान थे.
राजपूत वास्तुकला
राजपूत शासक खूबसूरत मंदिरों, किलों और महलों के निर्माण के सन्दर्भ में एक गहरी अंतर्दृष्टि रखते थे.
बहमनी साम्राज्य
बहमनी साम्राज्य, मध्यकालीन भारत का मुस्लिम साम्राज्य था जिसका विस्तार दक्षिण भारत के दक्कन में था.
तालीकोटा की लड़ाई (1565  ईस्वी)
तालीकोटा की लड़ाई 26 जनवरी 1565 ईस्वी को दक्कन की सल्तनतों और विजयनगर साम्राज्य के बीच लड़ा गया था.
कृष्ण देव राय: (1509-1529  ईसवी)
कृष्ण देव राय विजयनगर साम्राज्य का सबसे प्रभावशाली शासक था| इसका संबंध तुलुवा वंश से था|
विजयनगर साम्राज्य: तुलुवा  वंश
यह विजयनगर साम्राज्य का तीसरा वंश था I इस साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक कृष्ण देव राय इसी वंश से संबंधित था I
विजयनगर साम्राज्य: सलुव  राजवंश
यह विजयनगर साम्राज्य पर राज करने वाला दूसरा राजवंश था.
विजयनगर साम्राज्य  (1336ईस्वी-1646ईस्वी): एक  परिचय
विजयनगर साम्राज्य पर चार राजवंशों ने शासन कार्य किया था- संगम राजवंश, सलुव राजवंश, तुलुव राजवंश और आरविडू राजवंश.
विजयनगर साम्राज्य: संगम  राजवंश
संगम राजवंश, विजयनगर पर शासन करने वाला पहला वंश था.
उत्तरवर्ती मुगल शासक
औरंगजेब मुगल साम्राज्य का अंतिम महान शासक था. उसकी मृत्यु के पश्चात जितने भी मुग़ल शासक मुग़ल सिहांसन पर बैठे वे सभी उत्तरवर्ती मुग़ल के रूप में जाने जाते हैं.
शिवाजी के बाद मराठे
शिवाजी की मृत्यु के बाद उनके पुत्र, संभाजी मराठों के राजा बने. उन्होंने मुगल प्रदेशों पर हमले जारी रखा.
शिवाजी और मुगल
दक्कन में अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के बाद, शिवाजी नें मुगल प्रदेशों की ओर ध्यान दिया.
शिवाजी: महान मराठा नायक
शिवाजी को मराठा साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है. उनकी राजधानी रायगढ़ थी.
औरंगज़ेब के विरुद्ध हुए  विभिन्न विद्रोह
औरंगज़ेब की कट्टर धार्मिक नीतियों के मुगल साम्राज्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़े.
औरंगज़ेब आलमगीर (1658-1707)
औरंगज़ेब 1658 मे मुगल साम्राज्य की गद्दी पर बैठा। उसने आलमगीर का खिताब ग्रहण किया।
शाहजहां के पुत्र
शाहजहां के चार पुत्र थे, जिनके नाम थे- औरंगजेब, दारा शिकोह, शाह शुजा और मुराद बख्श.
शाहजहां की दक्कन नीति
अकबर ने अपने शासन काल के सीमित समय के अन्दर दक्कन के केवल एक छोटे से हिस्से पर ही विजय प्राप्त किया था जिसमें खानदेश और बरार शामिल थे.
भारत में वास्को डी गामा का  आगमन
वास्को डी गामा कप्पड़ पर कालीकट के निकट 20 मई 1498 ईस्वी को भारत में आया था.
शाहजहां (1627-1658)
शाहजहां, जहांगीर और मारवाड़ के राणा की पुत्री एवं राजपूत राजकुमारी, का पुत्र था.
जहांगीर के खिलाफ खुसरो का  विद्रोह
खुसरो मिर्ज़ा, जहांगीर का ज्येष्ठ पुत्र था. उसने अपने पिता और वर्तमान शासक जहाँगीर के खिलाफ 1606 ईस्वी में विद्रोह कर दिया था.
जहांगीर (1605-1627)
1605 ईस्वी में अकबर की मृत्यु के बाद सलीम, नुरुद्दीन जहांगीर के नाम से सिंहासन पर बैठ गया.
अकबर की मृत्यु
अकबर मुगल वंश का सबसे महान शासक था. उसकी मृत्यु 29 अक्टूबर 1605 ईस्वी को हुई थी.
दीन-ए-इलाही
दीन-ए-इलाही को 1582 ईस्वी में अकबर द्वारा प्रतिपादित किया गया था. इसे तौहीद-ए-इलाही के नाम से भी जाना जाता था.
अकबर के अन्य प्रशासनिक सुधार
वास्तव मे अकबर पूरे मुगल प्रशासन का सर्वे-सर्वा था। सारे कार्यकारी ,विधायी और न्यायिक फैसले उसके नाम से ही लिये जाते थे.
अबुल फजल: अकबरनामा के लेखक
अबुल फजल अपने छोटे भाई फैजी की तरह सम्राट अकबर के दरबार में नवरत्नों की सूची में से एक था |

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