करंट अफेयर्स 13 नवम्बर 2017

1.हिन्द -प्रशांत क्षेत्र में भारत को मिला तीन देशों का साथ

• हिन्द  प्रशांत क्षेत्र में चीन की चुनौती का मुकाबला करने के लिए भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका एकसाथ आए हैं। इस क्षेत्र में सहयोग और उसके भविष्य की स्थिति पर चारों देशों ने रविवार को मनीला में पहली बार वार्ता की। 

• चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक ताकत के बीच इन देशों ने माना है कि स्वतंत्र, खुला, खुशहाल और समावेशी हिन्द -प्रशांत क्षेत्र से दीर्घकालिक वैश्विक हित जुड़े हैं। भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान को मिलाकर चतुष्कोणीय संगठन बनाने का विचार 10 साल पहले आया था। अब जाकर यह अस्तित्व में आया है। 

• इस पहल को दक्षिण चीन सागर में चीन की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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• दक्षिण चीन सागर के इलाके में चीन का कई पड़ोसी देशों से विवाद है। हिंद महासागर के क्षेत्र में भी वह अपना प्रभाव बढ़ाने की जुगत में लगा है। चार लोकतांत्रिक देशों के बीच यह पहली बैठक थी, जिसमें आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने और अन्य सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की गई। 

• नई दिल्ली में विदेश मंत्रलय की ओर से बताया गया कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के अधिकारियों ने मनीला में मुलाकात की। इस दौरान हिन्द -प्रशांत क्षेत्र में पारस्परिक हित के कई मसलों पर चर्चा की गई। बयान में बताया गया कि चर्चा के दौरान इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और खुशहाली के लिए सहयोग बढ़ाने पर मुख्य रूप से ध्यान दिया गया। 

• चारों देशों के बीच सहमति बनी कि एक स्वतंत्र, खुला, समृद्ध और समावेशी हिन्द -प्रशांत क्षेत्र इन सभी देशों और दुनिया के दीर्घकालिक हितों के लिए कार्य कर सकता है। भारतीय अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति इस क्षेत्र में हमारे कार्यो की आधारशिला है।

• यह मीटिंग ऐसे समय में हुई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को ही फिलीपींस के तीन दिवसीय दौरे पर मनीला पहुंचे हैं। वह 15वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन और 12वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। 

• आसियान देश भारत की विदेश नीति के केंद्र रहे हैं। 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने लुक ईस्ट पॉलिसी शुरू की थी। क्षेत्रीय देशों के संगठनों से सहयोग बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे एक्ट ईस्ट पॉलिसी में बदल दिया है।
2. ईरान ने परमाणु बैटरी बनाने वाली प्रौद्योगिकी हासिल की
• ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन (एईओओआई) के प्रमुख के एक वरिष्ठ सहयोगी ने घोषणा की है कि एईओआई के विशेषज्ञों ने परमाणु बैटरी बनाने वाली प्रौद्योगिकी हासिल कर ली है।

• समाचार एजेंसी ‘‘फार्स’ द्वारा शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार असकर जारेन ने शहर-ए-कुर्द में कहा, ईरान उन देशों के समूह में शामिल हो गया है, जो इस प्रौद्योगिकी को हासिल कर परमाणु बैटरी का उत्पादन करते हैं। 

• जारेन ने कहा, नैनो-प्रौद्योगिकी के उपयोग से ईरान द्वारा निर्मित परमाणु बैटरी के आवश्यक परीक्षण किए गए हैं। उन्होंने कहा, उत्पाद का व्यवसायीकरण चल रहा है और औद्योगिक पैमाने पर इस उत्पाद का उत्पादन ईरानी वर्ष 20 मार्च, 2018 के अंत तक किया जाएगा। 

• परमाणु बैटरी एक ऐसा उपकरण होता है, जो बिजली उत्पादन के लिए रेडियोधर्मी आइसोटोप के क्षय से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा का उपयोग करता है।
3. ट्रंप ने रूस को लेकर विरोधियों की निंदा की

• अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी एशिया यात्रा के दौरान रविवार को कई ट्वीट करके अपने विरोधियों की निंदा की और कहा कि अमेरिका-रूस संबंधों को लेकर उनके आलोचक और मूर्ख लोग राजनीति कर रहे हैं। वहीं उन्होंने कहा, वह उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को कभी भी छोटा और मोटा नहीं कहेंगे।

• एशिया में पांच देशों के दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति वाशिंगटन से यहां आने के दौरान ट्विटर पर ज्यादातर शांत थे, लेकिन हनोई में आधिकारिक स्वागत समारोह से पहले उन्होंने कई ट्वीट किए। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपने संबंधों, चीन द्वारा प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम रोकने के प्रयासों सहित उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को लेकर एक व्यंग्यात्मक ट्वीट किया है। 

• रूसी नेता के साथ करीबी कामकाजी संबंध बनाने के प्रयासों की आलोचना करने वाले विरोधियों की ट्रंप ने निंदा की है। राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, नफरत करने वाले और मूर्ख लोगों को कब अहसास होगा कि रूस के साथ अच्छे संबंध अच्छी बात है न कि गलत। उन्होंने कहा, हमेशा राजनीति करना हमारे देश के लिए बुरा है।

• मैं उत्तर कोरिया, सीरिया, उक्रेन, आतंकवाद के मुद्दों को सुलझाना चाहता हूं और रूस इसमें बड़ी मदद कर सकता है। ट्रंप द्वारा किया गया ट्वीट उत्तर कोरिया और इसके परमाणु हथियारों की महत्वकांक्षाओं पर भी केंद्रित था। 

• उत्तर कोरिया के अधिकारियों और सरकारी मीडिया द्वारा उन्हें बूढ़ा व्यक्ति कहे जाने के बाद ट्रंप इस टिप्पणी से आहत हो गए हैं और उन्होंने इस टिप्पणी को उत्तर कोरियाई नेता द्वारा की गयी निजी टिप्पणी के तौर पर लिया है। 

• ट्रंप ने कहा, किम जोंग-उन ने क्यों मेरा अपमान बूढ़ा कहकर किया जबकि मैं उन्हें कभी भी छोटा और मोटा नहीं कहूंगा। और हां, मैं उनका दोस्त बनने की काफी कोशिश करता हूं और संभव है कि ऐसा किसी दिन हो जाए।

• जिनपिंग उ. कोरिया पर कड़े प्रतिबंध पर सहमत : राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, चीनी नेता शी जिनपिंग उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्योंगयांग के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप ने अपने एशिया दौरे के दौरान हनोई से ट्वीट करते हुए कहा, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि वह उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिबंध बढ़ा रहे हैं। 

• द. चीन सागर पर मध्यस्थता की पेशकश : राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिण चीन सागर से जुड़े विवादों की मध्यस्थता की पेश की है। दूसरी ओर उनके चीनी समकक्ष ने विवादित जलक्षेत्र में पेइचिंग की सैन्य तैयारियों और युद्ध की संभावना को लेकर जताई जा रही चिंताओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। 

• मनीला में दक्षिण एशियाई देशों, अमेरिका, चीन और अन्य शक्तिशाली देशों के वार्षिक सम्मेलन से पहले ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्षेत्र से जुड़े विवाद को लेकर अलग-अलग बात की। ट्रंप ने कहा, मैं बहुत अच्छा मध्यस्थ हूं। हालांकि उनके पेशकश को लेकर बहुत सारी दिक्कतें हैं।
4. लेबनान और सऊदी अरब में बढ़ा तनाव
• लेबनान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। लेबनान के प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी सऊदी अरब की राजधानी से पिछले हफ्ते इस्तीफा देने के बाद स्वदेश नहीं लौटे हैं। लेबनान ने सऊदी अरब पर हरीरी के अपहरण का आरोप लगाया है। जबकि सऊदी अरब का कहना है कि हरीरी ने अपने सहयोगी लेबनानी संगठन हिजबुल्ला से जान को खतरा के चलते इस्तीफा दिया। 

• इस बीच अमेरिका और फ्रांस ने लेबनान की संप्रभुता और स्थिरता के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है।1लेबनान के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति मिशेल औउन ने अपने राजदूतों से कहा कि प्रधानमंत्री साद अल- हरीरी का अपहरण किया गया है। उन्हें राजनयिक छूट मिलनी चाहिए। 

• औउन ने सऊदी अरब से पूछा है कि अपने इस्तीफे की घोषणा के बाद से हरीरी अब तक क्यों नहीं लौटे। इस तरह के संकेत भी मिले हैं कि मिशेल ने हरीरी का इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया है। हरीरी की पार्टी फ्यूचर मूवमेंट ने भी कहा है कि वह पूरी तरह उनके साथ है। परिवार के लोगों और सहयोगी के संपर्क करने पर हरीरी का कहा कि वह ठीक हैं। 

• स्वदेश लौटने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह ईश्वर की इच्छा पर निर्भर करता है। हरीरी से लौटने की अपील : बेरुत मैराथन में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री हरीरी से स्वदेश लौटने की अपील की। 

• मैराथन के 42.2 किलोमीटर मार्ग में दर्शक तख्ती लिए खड़े थे जिन पर ‘आपके लिए दौड़ रहे’ और ‘आपके लौटने का इंतजार’ लिखा था। 1क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई : सुन्नी सऊदी अरब और शिया ईरान के बीच क्षेत्र में वर्चस्व के लिए जारी लड़ाई से अब आसपास के देश भी प्रभावित हो रहे हैं। इसके चलते सीरिया, इराक, यमन और बहरीन में उथल-पुथल मचा हुआ है। 

• अब लेबनान भी निशाने पर है जहां ईरान समर्थित हिजबुल्ला को कमजोर करने के लिए सऊदी अरब लंबे समय से प्रयास कर रहा है। बताया जाता है कि सऊदी अरब लेबनान में साद अल- हरीरी की जगह उनके बड़े भाई बाहा को प्रधानमंत्री बनाना चाहता है।

• लेबनान से क्या है परेशानी : चार नवंबर को रियाद एयरपोर्ट को निशाना बनाकर यमन से मिसाइल दागी गई। सऊदी अरब का आरोप है कि यह मिसाइल ईरान और लेबनान ने तैयार की थी। सऊदी अरब यमन में हाउती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। 

• विद्रोहियों को लेबनानी संगठन हिजबुल्ला का समर्थन है। हिजबुल्ला हथियार संपन्न लड़ाकू संगठन है। लेबनान ने सऊदी अरब पर लगाया प्रधानमंत्री हरीरी के अपहरण का आरोप सऊदी अरब ने कहा, हिजबुल्ला से जान को खतरा के चलते हरीरी ने इस्तीफा दिया
5. कैटेलोनिया में लोग फिर सड़क पर
• स्पेन से अलग होने के लिए आंदोलन चलाने वाले जेल में बंद कैटेलोनिया के नेताओं की रिहाई की मांग को हजारों लोगों ने मार्च में हिस्सा लिया।‘‘एफे’ की रिपोर्ट के अनुसार, बार्सिलोना के म्युनिसिपल पुलिस बल ने कहा कि 7,50,000 लोगों ने शनिवार को इस मार्च में हिस्सा लिया। 

• इन लोगों ने भंग की गई कैटेलोनिया की सरकार के आठ पूर्व सदस्यों व द कैटालान नेशनल एसेंबली (एएनसी) और ओमनियम कल्चरल नामक दो प्रमुख स्वतंत्रता संगठनों के अध्यक्षों की रिहाई की मांग की। एएनसी और ओमनियम ने शनिवार के प्रदर्शन का आयोजन किया था। 

• जेल में बंद अलगाववादी नेताओं में कैटालान क्षेत्रीय सरकार के पूर्व अध्यक्ष ओरियोल जनकुएरस भी शामिल हैं, जो अपने बाकी मंत्रिमंडल सदस्यों की तरह 27 अक्टूबर को क्षेत्र की स्वतंत्रता की घोषणा के लिए विद्रोह, राजद्रोह और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोपी हैं। 

• प्रदर्शनकारियों में शामिल कई स्वतंत्रता समर्थकों ने एस्टेलादा झंडे (कैटेलोनिया की स्वतंत्रता के समर्थकों द्वारा इस्तेमाल में लाया जाने वाला ध्वज) के साथ सागरदा फेमिला र्चच के पीछे से बार्सिलोना के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों तक मार्च किया। 

• प्रदर्शनकारियों ने ‘‘राजनीतिक कैदियों की स्वतंत्रता’ और ‘‘हम एक गणराज्य हैं’ जैसे नारे लिखे बैनर लिए हुए थे। बार्सिलोना के मेयर अदा कोलाउ ने भी इस मार्च में हिस्सा लिया।
6. मध्यस्थता के तंत्र से घटेगा अदालतों का बोझ

• अदालतों में लगते मुकदमों के अंबार से परेशान सरकार ने अब इन्हें कम करने के विकल्पों पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए सरकार देश में मध्यस्थता यानी आर्बिट्रेशन के तंत्र को और मजबूत बनाने की तैयारियों में जुट गई है। इसके तहत सरकार आपराधिक मामलों को छोड़कर अन्य सभी विवादों के लिए अदालत में जाने से पूर्व मध्यस्थता के तंत्र को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है।

• माना जा रहा है कि साल 2018 में विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग की प्रक्रिया शुरू होने से पहले सरकार इस पर अमल सुनिश्चित कर देगी। कानून मंत्रलय का मानना है कि इससे भारत शीर्ष 50 देशों की सूची में तो शामिल होगा ही। रैंकिंग इससे भी काफी ऊपर हो सकती है। 

• मध्यस्थता तंत्र में सभी तरह के व्यावसायिक, कारोबारी और संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामलों को लाने की कोशिश है। कानून मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इसका लाभ यह होगा कि अधिकांश मामलों को मध्यस्थता के जरिये निपटाया जा सकेगा। इससे अदालत पर बढ़ते बोझ से बचा जा सकेगा।

• कानून मंत्रलय के मुताबिक, अदालतों में जाने वाले मामलों का बड़ा हिस्सा व्यावसायिक या वाणिज्यिक विवादों का होता है। इनके चलते न सिर्फ मुकदमों की संख्या बढ़ती है, बल्कि उद्योग जगत का कामकाज भी प्रभावित होता है। 

• ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग को लेकर सरकार की विश्व बैंक अधिकारियों से हुई वार्ता में एक नई जानकारी मिली है। पता चला है कि विवाद निपटाने में लगने वाला समय और इसकी जटिल प्रक्रिया दोनों के चलते विदेशी कंपनियां भारत में काम करने में हिचकिचाती हैं। इससे विदेशी निवेश भी प्रभावित होता है।

•  इस वर्ष की रैंकिंग में कानूनी अड़चन बड़ी बाधा के तौर पर उभर कर आया है। अधिकारी के मुताबिक, यही वजह है कि सरकार चाहती है कि अगले वर्ष की रैंकिंग में सुधार के लिए इस अड़चन को जल्द दूर कर लिया जाए। अधिकारी के मुताबिक मंत्रलय में अभी यह प्रस्ताव विमर्श के स्तर पर है। 

• चूंकि इस पर अमल का आदेश करने से पहले इसके लिए एक पुख्ता मध्यस्थता तंत्र गठित करने की भी जरूरत है।

• सरकार चाहती है कि देश में मध्यस्थता का स्थायी तंत्र विकसित हो। साथ ही विवादों का कानूनी समाधान आसान बनाया जाए।

• ऐसी व्यवस्था बने, जिससे कोर्ट जाने वाले मामलों की संख्या कम हो। विवाद को पहले मध्यस्थता तंत्र से गुजरना अनिवार्य बना दिया जाए।

• अभी पहले मुकदमा अदालत में दर्ज होता है। उसके बाद कोर्ट उसे मध्यस्थता के जरिये सुलझाने की पहल करता है। इससे मुकदमों का बोझ बढ़ता है।

• अदालत में जाने से पूर्व मध्यस्थता तंत्र का इस्तेमाल हो सकता है जरूरी

• ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में शीर्ष 50 पर आने में भी मिलेगी मदद
7. भारत नेट प्रोजेक्ट का दूसरा चरण आज से

• दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन ने कहा कि सरकार भारत नेट परियोजना के दूसरे और अंतिम चरण की सोमवार को शुरुआत करेगी। इस पर करीब 34,000 करोड़ रपए का व्यय होगा। इस परियोजना का मकसद मार्च 2019 तक सभी पंचायतों को उच्च गति का ब्राडबैंड उपलब्ध कराना है।

• परियोजना के तहत सरकार का मकसद 1.5 लाख पंचायतों को 10 लाख किलोमीटर अतिरिक्त आप्टिकल फाइबर के जरिये जोड़ना और दूरसंचार कंपनियों को 75 प्रतिशत कम मूल्य पर बैंडविद्थ तथा ग्रामीण क्षेत्रों में वाईफाई सेवाएं उपलब्ध कराना है। 

• अरुणा ने कहा, हम मार्च 2019 तक 1.5 लाख ग्राम पंचायतों को उच्च गति के ब्राडबैंड से जोड़ने के लिए भारत नेट के दूसरे चरण की कल शुरुआत करेंगे।

• दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा, कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद और मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर सोमवार को परियोजना की शुरुआत करेंगे। इस दौरान दूरसंचार मंत्रालय सात राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, आंध प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और झारखंड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
8. देश में नहीं खुलेगा कोई भी इस्लामिक बैंक
• भारत में इस्लामिक बैंक अब नहीं खुलेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने देश में इस्लामिक बैंक खोलने की इजाजत नहीं देने का फैसला लिया है। एक आरटीआइ में मांगी गई जानकारी के जवाब में आरबीआइ ने बताया कि सभी नागरिकों को वित्तीय और बैंकिंग सेवाओं के समान अवसर उपलब्ध हैं। इसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है। 

• इस्लामिक या शरिया बैंकिंग ऐसी वित्तीय व्यवस्था है, जो ब्याज नहीं लेने के सिद्धांत पर आधारित है। इसकी वजह यह है कि इस्लाम में ब्याज लेना हराम माना जाता है।1इस आरटीआइ में केंद्रीय बैंक से भारत में इस्लामिक या ब्याज रहित बैंकिंग शुरू करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी गई थी। 

• इसके जवाब में कहा गया है कि देश में इस्लामिक बैंक खोलने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार और आरबीआइ ने विचार किया था। देश के सभी नागरिकों के लिए बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं की सुलभता को ध्यान में रखते हुए ऐसे बैंक को नहीं खोलने का निर्णय लिया गया। 

• इससे पहले अप्रैल में केंद्रीय बैंक ने कहा था कि ब्याज मुक्त बैंकिंग शुरू करने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।1ब्याज मुक्त बैंकिंग प्रणाली के मसले पर गंभीरता से विचार करने के लिए साल 2008 के अंत में आरबीआइ के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया था। 

• इस समिति ने कहा था कि भारत में मुसलमानों की बड़ी आबादी के बीच कम साक्षरता है। अपने धर्म संबंधी बंदिशों के चलते गरीब मुसलमान परिवार बैंकिंग व्यवस्था से नहीं जुड़ पाते।

• केंद्र सरकार के निर्देश पर रिजर्व बैंक में एक अंतर विभागीय समूह ने देश में बिना ब्याज वाली बैंकिंग शुरू करने के कानूनी, तकनीकी और नियमन से जुड़े पहलुओं की व्यापक समीक्षा करने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। 

• आरबीआइ ने आइडीजी की इस रिपोर्ट की एक प्रति बीते साल वित्त मंत्रलय को भेजी थी। इस रिपोर्ट में शरीयत के अनुपालन वाली बैंकिंग शुरू करने के लिए मौजूदा बैंकों में ही एक इस्लामिक खिड़की खोलने का सुझाव दिया गया था।

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