करंट अफेयर्स 18 जनवरी 2018

दैनिक समसामयिकी 18 January 2018(Thursday)

1.दावोस सम्मेलन का पहली बार उद्घाटन करेंगे भारतीय पीएम
• दुनिया में भारत का डंका बज रहा है। स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाले विश्व आर्थिक फोरम की शुरुआत पहली बार भारत का कोई प्रधानमंत्री करेगा। नरेंद्र मोदी उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नए उभरते भारत की तस्वीर पेश करेंगे। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समापन भाषण देंगे।
• यह फोरम दुनिया में होने वाली आर्थिक गतिविधियांे का बड़ा केंद्र होता है। इस आर्थिक महाकुंभ में लगभग 140 देशों के राजनेता और अर्थशास्त्री मौजूद होंगे। दावोस में फोरम का चार दिनी सम्मेलन 23 जनवरी से शुरू होगा। इससे पहले प्रधानमंत्री के रूप में पीवी नरसिम्हा राव और एचडी देवगौड़ा दावोस जरूर गए थे, लेकिन उन्होंने सम्मेलन में सिर्फ हिस्सा लिया था।
• दरअसल नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद से जो कूटनीतिक प्रयास तेज किए, उसके परिणाम अब दिख रहे हैं। उन्होंने दुनिया के सभी प्रमुख देशों का दौरा कर संबंधों में गर्माहट ला दी। राष्ट्राध्यक्षों से निजी स्तर पर संबंध बनाए। भारत की यह कूटनीतिक पहल अब रंग दिखा रही है। इसी कड़ी में भारत के प्रधानमंत्री को विश्व आर्थिक फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
• हर देश इस सम्मेलन के जरिए अपनी अनुकूल छवि बनाने की कोशिश करते हैं। मोदी ने देशों के साथ आर्थिक रिश्ते भी मजबूत किए। विपक्ष भले मोदी के ‘हग डिप्लोमेसी’ का मजाक उड़ाता रहा हो लेकिन अमेरिका, इजरायल, फ्रांस, जर्मनी जैसे देशों का भारत के साथ पूरी दमदारी के साथ खड़े रहना बताता है कि भारत की कोशिशें सफल रही हैं।
• यह भारत की कामयाबी ही है कि पाकिस्तान का आतंकी चेहरा बेनकाब हो चुका है। इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह में 10 आसियान देशों के प्रमुख बतौर अतिथि शामिल होंगे।
• दावोस सम्मेलन में मौजूद रहने वालों में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, ब्रिटेन की पीएम टेरीजा मे, कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो, ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल टेमर, इटली के पीएम पाओलो जेंटिलोनी, यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जीन क्लॉड जंकर प्रमुख होंगे।

2. आधार योजना की सुनवाई में संविधान पीठ ने उठाए अहम सवाल
• आधार योजना की वैधता पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सुनवाई शुरू कर दी है। पीठ ने बुधवार को कई अहम सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में बायोमेटिक के इस्तेमाल में गलत क्या है? क्या अब तक आधार के लिए जुटाए गए आंकड़ों को नष्ट कर दिया जाय?’ सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।
• याची की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि इस मामले में सबसे पहले आधार योजना की संवैधानिकता को चुनौती देना चाहते हैं। आधार बनाने के लिए बायोमेटिक्स जुटाना सीधे निजता के अधिकार का हनन है। अगर कोई अपना फिंगर प्रिंट नहीं देना चाहता तो उसे आखिर कैसे बाध्य किया जा सकता है?
• वैसे तो आधार कार्ड बनवाना जरूरी नहीं बताया जाता है। लेकिन तमाम सरकारी कामों के लिए इसे अनिवार्य बना दिया गया है।’
• लोगों के जीवन में सरकार का बढ़ता दखल : श्याम दीवान ने इस योजना के चलते लोगों के जीवन में सरकार के बढ़ते दखल का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, ‘संविधान ने सरकार और लोगों के बीच एक संतुलन बना रखा था। इस योजना के बाद सरकार सर्वशक्तिमान नजर आती है। सरकार यह जान सकती है कि किसी ने अपने बैंक खाते में कितने पैसे डाले, कितने निकाले। कोई कहां गया, उसकी क्या गतिविधियां रहीं।’
• बायोमेटिक आंकड़े लीक होने पर उठाए सवाल : दीवान ने आधार के लिए जुटाए गए बायोमेटिक आंकड़ों के लीक होने का सवाल उठाते हुए कहा, ‘पूरा यूआइडीएआइ 115 लोग और 38 सपोटिर्ंग स्टाफ चला रहे हैं। कई बार यूआइडीएआइ से आंकड़े लीक होने की खबरें आई हैं।’
• शारीरिक श्रम करने वालों का फिंगर प्रिंट स्पष्ट नहीं होते : दीवान ने कहा कि देश मे 15 फीसद आबादी ऐसे लोगों की है जो शारीरिक श्रम करते हैं। ऐसे लोगों के फिंगर प्रिंट अक्सर स्पष्ट नहीं होते।
• 15 से कम और 60 से ज्यादा उम्र के लोगों के फिंगर प्रिंट साफ नहीं होते। लगभग छह करोड़ लोगों के आधार कार्ड अस्पष्ट फिंगर प्रिंट के चलते नहीं बन पाए।

3. विदेश मंत्री ने ‘रायसीना डायलॉग’ में लिया हिस्सा, आतंकवाद को बताया हर विघटन की जड़
• रायसीना डायलॉग’ में हिस्सा लेने आए तमाम विदेशी कूटनीतिक विशेषज्ञों, मंत्रियों और रणनीतिकारों को भारत ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ वह अब बहुत ज्यादा सहन करने को तैयार नहीं है। एक तरफ सेना प्रमुख ने साफ संकेत दिया कि भारत जरूरत पड़ने पर आतंकियों के खिलाफ हरसंभव कार्रवाई करेगा, तो दूसरी तरफ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी कहा कि अभी आतंकवाद पर जीरो-टॉलरेंस वक्त की जरूरत है।
• सुषमा ने आतंक को अभी दुनिया में तमाम विघटनकारी घटनाओं का सबसे बड़ा जरिया बताते हुए कहा कि कुछ देश मानते हैं कि आतंकवाद को समर्थन देने की नीति वे अब भी जारी रख सकते हैं।
• स्वराज ने कहा कि पिछले कुछ दशकों से आम जनता के जीवन में जिस तरह से डिजिटल माध्यम ने प्रवेश किया है, उसे देखते हुए आतंकवाद की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। कट्टरपन बढ़ने के सारे सुबूत मिल रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर और मजबूत सामंजस्य बनाना होगा। इसी तरह से परमाणु हथियारों व तकनीक की चोरी के खिलाफ भी देशों को समग्र तौर पर कदम उठाने होंगे।
• स्वराज ने हथियारों के गैर कानूनी कारोबार को लेकर सांकेतिक भाषा में पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के संबंधों की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कई तरह की जो घटनाएं सामने आ रही हैं, उसके जड़ में हथियारों का गलत कारोबार ही है। लेकिन विश्व बिरादरी इसे काफी समय तक नजरअंदाज करती रही।
• सनद रहे कि भारत पहले भी कहता रहा है कि उत्तर कोरिया को कहां से परमाणु बम बनाने की तकनीकी मिली है उसकी जांच होनी चाहिए। कई लोग यह मानते हैं कि उत्तर कोरिया को यह तकनीक पाकिस्तान से ही मिली है।
• विश्व बिरादरी के सामने भारत ने यह भी संकेत दिया कि कनेक्टिविटी के मुद्दे पर वह अपनी सीमित क्षमता के बावजूद एक बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है। स्वराज ने अफगानिस्तान की मदद के लिए चाबहार पोर्ट बनाने या एयर कारिडोर शुरू करने के अलावा भारत से म्यांमार-थाईलैंड तक सड़क मार्ग बनाने का भी जिक्र किया।
• उन्होंने कहा कि म्यांमार-थाईलैंड तक बनने वाली सड़क आने वाले दिनों में पूरे आसियान को जोड़ने वाली साबित हो सकती है।
• नई नार्थ-साउथ कारिडोर भारत को ईरान और यूरोप से जोड़ने वाला साबित हो सकता है। लेकिन स्वराज भारत की कनेक्टिविटी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए यह कहना नहीं भूलीं कि इन परियोजनाओं के साथ दूसरे देशों की संप्रभुता और उनकी भौगोलिक अखंडता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
• सनद रहे कि भारत चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना का इस तर्ज पर विरोध करता है कि वह हमारी भौगोलिक संप्रभुता का सम्मान नहीं करता है।

4. साइबर अपराध से निपटने को बनेगा विशेष पुलिस बल
• बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए सरकार ने नए साइबर पुलिस बल के गठन का फैसला किया है। सरकार की कोशिश देश के हर जिले में साइबर अपराधियों से निपटने के लिए विशेष साइबर पुलिस बल की नियुक्ति की है। इसके साथ ही साइबर अपराध से जुड़ी सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए केंद्रीय स्तर पर इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर भी बनाया जाएगा।
• यह पूरा तंत्र गृह मंत्रालय के अधीन गठित नए साइबर अपराध डिविजन के तहत काम करेगा। दरअसल बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए दो महीने पहले गृह मंत्रालय में एक साइबर अपराध और सूचना विभाग का गठन किया गया था।
• गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस विभाग की कार्यप्रणाली की तैयारियों की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान देश में नये साइबर पुलिस बल के गठन के साथ-साथ कई फैसले किये गए। राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया कि देश भर में आम लोगों को साइबर सुरक्षा का अहसास होना चाहिए और उसके लिए जरूरी सभी कदम उठाना होगा।
• साइबर अपराधियों की अत्याधुनिक तकनीक और साइबर दुनिया में पहचान छुपाने में महारत को देखते हुए इससे निपटने में सामान्य पुलिस नाकाफी साबित हो रही है। सभी राज्यों ने साइबर अपराध शाखा का गठन हो गया है, लेकिन उनमें भी सामान्य पुलिस वालों की नियुक्ति हो रही है, जिनकी साइबर दुनिया के बारे में जानकारी नगण्य है।
• ऐसे में साइबर अपराधियों से निपटने के लिए विशेष पुलिस बल की जरूरत है। इसी लिए साइबर पुलिस बल बनाने का फैसला किया गया। इसमें साइबर विशेषज्ञों की भी नियुक्ति की जा सकती है।

5. सेफगार्ड शुल्क से सौर परियोजनाओं पर संकट
• साख निर्धारक तथा बाजार शोध एवं सलाह कंपनी क्रिसिल का कहना है कि चीन और मलयेशिया से आयात होने वाले सौर पैनलों तथा माड्यूलों पर 70 फीसद सेफगार्ड शुल्क लगाने से 12,000 करोड़ रूपये की सौर परियोजनाएं खतरे में पड़ सकती हैं।
• सेफगार्डस महानिदेशालय ने चीन व मलयेशिया से आयात होने वाले सौर पैनलों तथा मॉड्यूलों पर 70 फीसद सेफगार्ड शुल्क लगाने की अनुशंसा की है। क्रिसिल ने आज जारी बयान में कहा है कि इससे तीन गीगावाट क्षमता की निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए संकट पैदा हो सकता है।
• इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 12,000 करोड़ रूपये है। साथ ही परियोजनाओं की लगात 25 फीसद तक बढ़ सकती है जिसकी वजह से बिजली वितरण कंपनियों को प्रति इकाई बिजली की दर बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
• उसने बताया कि पिछले साल चार गीगावाट की सौर परियोजनाओं का बोली प्रक्रिया के जरिए आवंटन किया गया था जिन पर अभी काम चल रहा है। खास बात यह है कि मॉड्यूलों के ऑर्डर तकरीबन एक साल की आपूर्ति अवधि के साथ दिए जाते हैं।क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक सुबोध राय ने कहा, 70 फीसद सेफगार्ड शुल्क लगाने से परियोजनाओं की लागत भी लगभग 25 फीसद बढ़ जाएगी।
• इससे पहले अनुमानित तीन रपए प्रति इकाई की दर 3.75 रूपये तक के स्तर पर पहुंच सकती है।
• इससे 12000 करोड़ की परियोजनाएं हो सकती हैं प्रभावित
• चीन व मलयेशिया से आयातित उपकरणों पर 70 फीसद शुल्क लगाने का है प्रस्ताव
• इससे 25% बढ़ जाएगी परियोजनाओं की कुल लागत
• शुल्क लगने से काफी महंगी हो सकती है सौर ऊर्जा की दर

6. अब कम अतिरिक्त उधार लेना पड़ेगा सरकार को
• राजकोषीय घाटे को काबू में रखने की कवायद कर रही सरकार चालू वित्त वर्ष में अब कम धनराशि उधार लेगी। वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने पहले 50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी लेने की घोषणा की थी लेकिन अब वह सिर्फ 20,000 करोड़ रुपये ही उधार लेगी। माना जा रहा है कि बेहतर राजस्व प्राप्ति और व्यय पर नियंत्रण के संकेत मिलने के बाद मंत्रालय ने यह कदम उठाया है।
• सरकार को बजट में तय उधारी के अतिरिक्त यह कर्ज लेना पड़ रहा है क्योंकि राजस्व खासकर जीएसटी संग्रह अनुमान से कम रहा है।
• वित्त मंत्रलय ने आम बजट से ठीक पहले राजस्व व व्यय की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के बाद यह घोषणा की। इससे पहले मंत्रालय ने 27 दिसंबर को कहा था कि सरकार चालू वित्त वर्ष में 50,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त धनराशि उधार लेगी। हालांकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि इससे आम बजट में निर्धारित शुद्ध उधारी की सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा।
• मंत्रालय ने उधारी की यह घोषणा ऐसे समय की थी जब सरकार का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में नवंबर तक बजट अनुमान के मुकाबले 112 प्रतिशत हो गया था।
• वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने ट्वीट करके कहा कि सरकार ने राजस्व प्राप्तियों और व्यय पैटर्न को देखते हुए उधार लेने की जरूरत की समीक्षा की है। यही वजह है कि अब पूर्व में घोषित 50,000 करोड़ रुपये के बजाय सिर्फ 20,000 करोड़ रुपये की ही धनराशि उधार ली जाएगी।
• वैसे चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 3.2 प्रतिशत के बराबर रखा है। ऐसे में माना जा रहा था कि अगर सरकार यह अतिरिक्त धनराशि उधार ले लेती तो शायद राजकोषीय गणित गड़बड़ा जाता। इसका राजकोषीय संतुलन पर जरूर असर पड़ता।
• उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष में जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद परोक्ष कर राजस्व में अपेक्षानुरूप वृद्धि नहीं हुई है। खासकर जीएसटी संग्रह अक्टूबर और नवंबर के लिए काफी कम रहा है। साथ ही गैर-कर राजस्व में भी अपेक्षानुरूप वृद्धि नहीं हुई है। यही वजह है कि राजकोषीय घाटे की सीमा लांघने की आशंकाएं गहराने लगीं थी।
• बताया जाता है कि सरकार ने रिजर्व बैंक से अधिक लाभांश की मांग भी की है। उल्लेखनीय है कि पिछले वित्त वर्ष में नोटबंदी के फैसले के बाद आरबीआई ने सरकार को मात्र 30,659 करोड़ रुपये लाभांश ही दिया है।

7. फलस्तीन की आर्थिक मदद में भारी कटौती
• यरुशलम को इजरायल की राजधानी का दर्जा देने के बाद अमेरिका ने अब फलस्तीन को दी जाने वाली साढ़े छह करोड़ डॉलर (415 करोड़ रुपये) की आर्थिक मदद पर रोक लगा दी है। अमेरिकी सरकार ने यह रोक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आर्थिक मदद को बेमतलब करार देने के बाद लगाई है।
• अमेरिका संयुक्त राष्ट्र की राहत और कल्याण एजेंसी के जरिये फलस्तीन को आर्थिक सहायता देता है। इस बार उसने छह करोड़ डॉलर (383 करोड़ रुपये) की मदद दी जबकि बाकी साढ़े छह करोड़ डॉलर की मदद रोक दी। विदेश मंत्रलय के अनुसार अमेरिका ने ऐसा अपने सुधार कार्यक्रम के तहत किया है।
• फलस्तीनी मुक्त संगठन से जुड़े वासेल अबू यूसेफ ने अमेरिका के इस कदम की निंदा की है। कहा है कि यह अमेरिका के फलस्तीन के वजूद को नकारने का सुबूत है। इसे ट्रंप के यरुशलम को लेकर लिए निर्णय के विरोध का नतीजा भी बताया।
• बीती छह दिसंबर को ट्रंप ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देते हुए वहां अमेरिका का दूतावास स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। इसके बाद फलस्तीन कब्जे वाले इलाके और मुस्लिम जगत में विरोध भड़क उठा था। फलस्तीन ने अमेरिका के संरक्षण में चल रही शांति प्रक्रिया से दूरी बना ली थी।
• संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने अमेरिका की ओर से सहायता में कटौती की जानकारी से इन्कार किया है। कहा है कि अगर यह खबर सही है तो चिंता की बात है। क्योंकि यह धनराशि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के कार्यो पर खर्च की जाती थी। इसमें बाधा आएगी। जबकि एजेंसी के कमिश्नर जनरल ने कहा है कि इस कटौती से मध्य-पूर्व में मानवीय सहायता के सबसे सफल कार्यक्रम में खलल पड़ेगा।

8. असामान्य है पिंडारी ग्लेशियर का पीछे खिसकना
• हिमालय के एक और बड़े हिमनद (ग्लेशियर) पिंडारी का अस्तित्व संकट में है। वर्तमान में यह जीरो प्वाइंट से 200 मीटर पीछे खिसक गया है। इससे पिंडर घाटी के 17 जलस्रोत भी सूखने लगे हैं।
• यह जानकारी उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आई है।
• अध्ययन दल के सदस्य प्रकाश जोशी ने बताया कि पिंडारी ग्लेशियर अब विलुप्त होने के संकेत दे रहा है। पिछले एक साल में ग्लेशियर का 200 मीटर और पीछे खिसकना बेहद चिंता की बात है। अब यह जीरो प्वाइंट से 700 मीटर तक पीछे खिसक चुका है।
• इस बार इसके पीछे खिसकने की दर औसत से बेहद अधिक है। यानी कम बर्फबारी के कारण एक ही वर्ष के भीतर ग्लेशियर के सिकुड़ने की दर कई गुना बढ़ गई है। हालात इतने विकट हो चले हैं मानो पिंडारी ग्लेशियर उद्गम पर्वतमालाओं की तलहटी पर अपना वजूद तलाश रहा है।
• अध्ययन दल के नतीजे: गंगोत्री हिमनद जहां प्रतिवर्ष 22.25 मीटर पीछे खिसक रहा है, वहीं पिंडारी ग्लेशियर का 200 मीटर और पीछे खिसक जाना असामान्य है। गंगोत्री के बाद यह इस रेंज में दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर है।
• नंदादेवी व नंदाकोट पर्वतमाला की तलहटी पर ग्लेशियर का वजूद लगभग खत्म हो चुका है।
• पैदल ट्रैक हुआ बर्फविहीन: रिपोर्ट के अनुसार करीब एक दशक पहले आठ किमी पूर्व फुर्किया से जीरो प्वाइंट तक सर्दियों में ट्रैकिंग बर्फ के कारण नहीं हो पाती थी। मगर वर्तमान में इस पूरे इलाके में ग्लेशियर है ही नहीं। सिर्फ पत्थर व जमीन ही दिखाई देती है।

9. नेशनल एक्शन प्लान ऑन डेयरी डेवलपमेंट का विजन 2022 जारी
• कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बुधवार को नेशनल एक्शन प्लॉन ऑन डेयरी डेवलपमेंट के आधार पर बने विजन 2022 दस्तावेज को जारी किया।
• उन्होंने पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग के सामूहिक अंतरण संबंधी कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। इसी के साथ उन्होंने 20वें लाइव स्टॉक सेंसस के लिए डॉटा एकत्रित करने को एक सॉफ्टवेयर लांच किया। उन्होंने कहा कि भारत में 30 करोड़ बोवाइन हैं, जो विश्व की बोवाइन आबादी का 18% हैं।
• पारंपरिक और वैज्ञानिक ज्ञान के माध्यम से सैकड़ों सालों की मेहनत के बाद देशी बोवाइन आनुवांशिक संसाधन विकसित हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास गोपशुओं की 42 नस्लों के साथ-साथ याक और मिथुन के अलावा भैंसों की 13 नस्लें हैं।
• उन्होंने कहा कि 20वें लाइव स्टॉक सेंसस में प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया इनेशिएटिव के हिस्से के रूप में टेबलेट कम्प्यूटर का इस्तेमाल करने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर में सभी प्रकार के एनालिटिकल रिपोर्ट्स तैयार करने और सेंसस ऑपरेशन की रियल टाइम निगरानी की भी व्यवस्था होगी।
• कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने अगले 5 वर्षो में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डेयरी क्षेत्र की अहम भूमिका है।
• इस काम को पूरा करने के लिए पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग ने नेशनल एक्शन प्लॉन ऑन डेयरी डेवलपमेंट तैयार किया है।