दैनिक समसामयिकी 11 मार्च 2019

लोकसभा चुनाव सात चरणों में होंगे, नतीजे 23 मई को आयेंगे: चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने 10 मार्च 2019 को लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का एलान कर दिया है. चुनाव सात चरणों में कराए जाएंगे. अप्रैल और मई में सात चरणों में लोकसभा की 543 सीटों के लिए चुनाव कराए जाएंगे. इन चुनावों के नतीजे 23 मई को आएंगे.

मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा जारी जानकारी के अनुसार चुनाव का कार्यक्रम बनाते समय, परीक्षा कार्यक्रमों और त्योहारों का ध्यान भी रखा गया है. चुनावों में 90 करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. इनमें से लगभग डेढ़ करोड़ वोटर 18-19 आयु वर्ग के होंगे.

चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से देश में आचार संहिता लागू की

आचार संहिता के दौरान किसी व्यक्ति, पार्टी या संगठन के लिए कुछ सामाजिक व्यवहार, नियम एवं उत्तरदायित्वों को निर्धारित किया जाता है और इन्हीं सब को आचरण संहिता अथवा आचार संहिता अथवा code of conduct कहा जाता है.

आचार संहिता चुनाव आयोग द्वारा जारी कुछ नियमों की एक विस्तृत सूची होती है. इस दौरान राजनेताओं को नियमों का पालन करना होता है. आचार संहिता में चुनाव प्रक्रिया के दौरान उन्हें क्या करना है और क्या नहीं करना है, इस बारे में बताया गया होता है. इन नियमों का पालन चुनावी उम्मीदवारों को ना सिर्फ अपने भाषणों में करना होता है बल्कि सभी प्रकार के चुनावी प्रचार और यहां तक कि उनके घोषणापत्रों में भी करना होता है.

इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान जारी किया गया

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री हर्षवर्धन ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (ICAP) जारी किया है. इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान का उद्देश्य पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक लाभों को हासिल करने के लिये कार्यों में तालमेल का प्रयास करना है.

इसके अतिरिक्त इस एक्शन प्लान का उद्देश्य समाज को पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक लाभ प्रदान करते हुए सभी के लिये स्थायी शीतलन और उष्मीय सहूलियत प्रदान करना है. सभी क्षेत्रों में गर्मी से राहत दिलाने तथा सतत् शीतलता प्रदान करने वाले उपायों को अपनाने के बारे सलाह देना इसका एक उद्देश्य है.

इडुक्की के मरयूर गुड़ को जीआई टैग दिया गया

केरल के इडुक्की जिले में मिलने वाले मरयूर गुड़ को हाल ही में भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किया गया है. मरयूर गुड़ का निर्माण सदियों से पारंपरिक विधि द्वारा किया जाता है जिसके चलते इसे जीआई टैग के लिए चयनित किया गया.
राज्य के कृषि विभाग द्वारा दो वर्ष तक किये गये प्रयासों के बाद ही मरयूरी गुड़ को भौगोलिक संकेत हासिल हुआ है. जीआई टैग मिलने से क्षेत्रीय गन्ना किसानों को उनकी फसल के लिए अपेक्षित लाभ मिलने की आशा है.

कई क्षेत्रों में मरयूर किस्म की नकली गुड़ भी बड़े पैमाने पर बेची जाती है, जिसके कारण वास्तविक मरयूर गुड़ की कीमत भी कम ही रह जाती है. मरयूर गुड़ को जीआई टैग मिलने से उपभोक्ताओं को वास्तविक मरयूर गुड़ मिलेगा और किसानों को इसका अच्छा दाम भी मिलेगा.