दैनिक समसामयिकी 20 अगस्त 2017

*1.भारत को गार्डियन ड्रोन देगा अमेरिका, संबंध होंगे मजबूत*
• भारत को दो अरब डॉलर की अनुमानित राशि के समुद्र की निगरानी करने वाले 22 गार्डियन ड्रोन बेचने के अमेरिका के फैसले से उसके देश में करीब 2,000 नौकरियां पैदा होगी और द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे। इस सौदे में शामिल एक अमेरिकी कार्यकारी ने यह बात कही।
• अमेरिका एंव अंतरराष्ट्रीय सामरिक विकास, जनरल एटॉमिक्स के मुख्य कार्यकारी विवेक लाल ने शुक्रवार को अमेरिका के विचारक समूह अटलांटिक काउंसिल से कहा, इसे अमेरिका-भारत द्विपक्षीय रक्षा संबंध को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए। 
• लाल ने सीनेट इंडिया कॉकस के सह अध्यक्ष सीनेटर जॉन कोनिन की बात दोहराई जिन्होंने ट्वीट कर कहा, डोन की बिक्री से अमेरिका-भारत संबंध मजबूत होंगे। इस सौदे के संबंध में ट्रंप ने जून में घोषणा की थी जब वह व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे।
• लाल ने कहा, जनरल एटॉमिक्स द्वारा निर्मित डोन की भविष्य में होने वाली खरीद अमेरिका द्वारा ऐसे देश को डोन बेचने का पहला मामला है जो नाटो का सदस्य नहीं है। ऐसे समय में जब चीन ने दक्षिण चीन सागर पर अपनी निगाह गड़ा दी है तो लाल ने उम्मीद जताई कि भारत के पास हिंद महासागर में अपने हितों की रक्षा के लिए क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाने और उसका नेतृत्व करने का अवसर है। और यह काम वह क्षेत्रीय तथा क्षेत्र से इतर सहयोगियों के साथ समुद्री सहयोग बना कर कर सकता है।
• हाल में भारत ने इस्रइल से 40 करोड़ डॉलर के 10 उन्नत हेरोन डोन खरीदे थे। इस सौदे के साथ इस्रइल हथियार बेचने में अमेरिका का प्रतिस्पर्धी बन गया है। लाल के अनुसार, भारतीय नौसेना जब समुद्र की निगरानी करने वाले डोन का इस्तेमाल करेगी तो भारत की विश्वसनीय क्षमताएं बढ़ेगी जो समुद्री क्षेत्र में भारत की सुरक्षा के लिए अहम है। 
• उन्होंने कहा, इसके अलावा भारत इस क्षेत्र में समुद्री डकैती, आतंकवाद और मादक पदार्थो की तस्करी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

*✴2. नए कानून से प्रमोटरों को खतरा नहीं*
• इनसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। इससे कॉरपोरेट बांड मार्केट में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। यह कहना है बाजार नियामक सेबी के प्रमुख अजय त्यागी का। 
• त्यागी के मुताबिक बैंकिंग व्यवस्था में फंसे हुए कर्जो की स्थिति सिर के ऊपर पहुंच गई है। ऐसे में आइबीसी दिवालिया मामलों का निश्चित समय में निपटारा सुनिश्चित कर माहौल को कारोबार के अनुकूल बनाने में सहायक है। त्यागी भी सीआइआइ के कार्यक्रम में बोल रहे थे। 
• उन्होंने कहा, ‘कर्ज चुकाने में डिफॉल्ट करने के ज्यादा मामलों के कारण अब तक निवेशक कॉरपोरेट बांड से दूरी रखते रहे हैं।’
• दिवालिया कानून का मकसद कंपनी प्रमोटरों की तबाही नहीं बल्कि उन्हें बचाना है 1मुंबई, प्रेट्र : नए दिवालिया कानून को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कर्ज में फंसी कंपनियों के प्रमोटरों को आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि नए इनसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कानून का मकसद प्रमोटरों का खात्मा नहीं, बल्कि कर्ज वसूली सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनका बचाव भी है। 
• जेटली भारतीय उद्योग चैंबर सीआइआइ की ओर से इनसॉल्वेंसी और बैंक्रप्सी पर आयोजित सम्मेलन में बैंकरों व उद्यमियों को संबोधित कर रहे थे।
• केंद्रीय वित्त मंत्री ने कर्ज लेने वालों के बीच बेहतर ऋण संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘वह पुरानी व्यवस्था जिसमें लोन देने वाला कर्जदार का पीछा करते करते थक जाता था और अंत में उसके हाथ कुछ नहीं लगता था, अब समाप्त हो चुकी है। 
• अगर कर्जदाता को कारोबार में बने रहना है, तो उसे अपना कर्ज समय पर चुकाना होगा अन्यथा उसे दूसरे के लिए रास्ता छोड़ना पड़ेगा।’ ऋण वसूली सुनिश्चित करने वाले इनसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) को कर्जदाताओं के हाथ मजबूत करने वाला माना जा रहा है। बैंक व वित्तीय संस्थान आठ लाख करोड़ रुपये के फंसे कर्ज यानी एनपीए से जूझ रहे हैं। 
• कुल एनपीए में अकेले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ही 75 फीसद हिस्सेदारी है। जेटली ने कहा, ‘एनपीए की समस्या के समाधान के पीछे असल मकसद संपत्तियों को समाप्त करना नहीं, बल्कि व्यवसायों को बचाना है। यह काम चाहे इन कंपनियों के मौजूदा प्रमोटर खुद अथवा अपने साथ नया साङोदार जोड़कर करें या फिर नए उद्यमी आएं और यह सुनिश्चित हो कि इन मूल्यवान संपत्तियों को संरक्षित रखा जा सके।’
• वित्त मंत्री के मुताबिक सरकार ने केवल एक कानून में बदलाव नहीं किया है। केंद्र ने ऋण वसूली टिब्यूनलों (डीआरटी) की प्रक्रियाओं को बदला है। साथ ही सरफेसी कानून के प्रावधान भी संशोधित किए गए हैं। कदमों का सीधा और स्पष्ट संदेश है कि कर्जदारों को कर्ज का नियमित भुगतान सुनिश्चित करना होगा।

*✴3. बैंकों की पूंजी बढ़ाने को पैकेज का वादा*
• रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के गवर्नर उर्जित पटेल ने फंसे कर्ज यानी एनपीए से सर्वाधिक प्रभावित सरकारी बैंकों का पूंजी आधार बढ़ाने के लिए नए पैकेज का वादा किया है। उन्होंने कहा कि आरबीआइ और सरकार मिलकर बैंकों में नई पूंजी डालने के लिए यह पैकेज लाएंगे। 
• पटेल शनिवार को यहां प्रमुख उद्योग चैंबर सीआइआइ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बैंकरों और उद्यमियों को संबोधित कर रहे थे।1आरबीआइ गवर्नर ने कहा कि इस साल मार्च में बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 9.6 फीसद पर पहुंच गया। यह फंसे कर्ज का बेहद खराब स्तर है। 
• इसमें बड़े सुधार की जरूरत है। कुल एनपीए का 86.5 फीसद हिस्सा बड़े कर्जदारों के पास है। एनपीए की समस्या को दूर करने के कड़े प्रावधानों व अन्य कारणों से कई बैंकों की पूंजीगत स्थिति प्रभावित होगी।
• इसलिए बैंकों का पूंजीगत आधार बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी। सरकारी बैंकों को एक तय समयसीमा में अपेक्षित पूंजी जुटाने में सक्षम बनाने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक नए पैकेज पर बातचीत कर रहे हैं।
• उर्जित के मुताबिक बाजार से पूंजी जुटाने, सरकारी हिस्सेदारी के विनिवेश, केंद्र द्वारा अतिरिक्त पूंजी झोंकने, रणनीतिक निर्णयों के आधार पर विलय और कम महत्व वाली संपत्तियों की बिक्री करने जैसे कदमों पर विचार किया जा सकता है। 
• सरकार और आरबीआइ इस मुद्दे का व्यापक स्तर पर बहुआयामी समाधान तलाशने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इन प्रयासों के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। एनपीए की समस्या के समाधान के लिए हो रही कोशिशों की सफलता काफी कुछ सरकारी बैंकों के बहीखातों की क्षमता पर निर्भर करेगी। इससे तय होगा कि बैंक इसकी कितनी लागत वहन कर सकते हैं।
• फिलहाल बैंकों का कुल एनपीए इस समय आठ लाख करोड़ रुपये के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसमें से 75 फीसद हिस्सा सरकारी बैंकों का है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को संकट से उबारने के लिए सरकार ने इनमें मार्च, 2015 से मार्च, 2019 तक की चार साल की अवधि में 75,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने का बजटीय प्रावधान किया था।

*✴4. 36 साल में पहली बार 13,000 करोड़ रु. के शेयर बायबैक करेगी इन्फोसिस*
• देशकी दूसरी बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस अपने 36 साल के इतिहास में पहली बार शेयर बायबैक करेगी। कंपनी बोर्ड ने शनिवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक इन्फोसिस अपने निवेशकों से 11.3 करोड़ शेयर खरीदकर उन्हें कुल 13,000 करोड़ रुपए लौटाएगी। 
• कंपनी ने इस बायबैक के लिए प्रति शेयर 1,150 रुपए कीमत तय की है। यह बीएसई में शुक्रवार के बंद भाव 923.10 रुपए से करीब 25%और बीते तीन माह में शेयर के औसत मूल्य से 19.08% अधिक है। 
• इन्फोसिस ने बताया कि बायबैक ऑफर के तहत कंपनी अपने निवेशकों से कुल 11 करोड़ 30 लाख 43 हजार 478 शेयर वापस ले लेगी। यह कंपनी के कुल जारी शेयरों के 4.92% के बराबर है। साथ ही कुल चुकता इक्विटी पूंजी और फ्री-रिजर्व्स के 20.51% के बराबर है। 
• बोर्ड ने बायबैक की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए 7 सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें को-चेयरमैन रवि वैंकटेशन, एक्जीक्यूटिव वाइस-चेयरमैन विशाल सिक्का और इंटरिम सीईओ एमडी यूबी प्रवीण राव शामिल हैं। बायबैक की प्रक्रिया की समय सीमा और अन्य जानकारियों की घोषणा आगे की जाएगी। 
• इस प्रक्रिया को एक विशेष प्रस्ताव के जरिए शेयरधारकों की मंजूरी मिलनी बाकी है। कंपनी बोर्ड ने शेयर बायबैक के प्रस्ताव को ऐसे समय मंजूरी दी है जब शुक्रवार को विशाल सिक्का ने कंपनी के एमडी सीईओ पद से अचानक इस्तीफा देने की घोषणा की है। 
• गौरतलब है कि इस साल कई टेक कंपनियों ने बायबैक ऑफर लाने की घोषणा की है। इसमें देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस ने 16,000 करोड़ रुपए के मेगा बायबैक ऑफर की पेशकश की है। इसके अलावा अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियां मसलन कॉग्निजेंट, विप्रो, एचसीएल टेक, माइंडट्री भी ऐसी घोषणाएं कर चुकी हैं। 
• 12-18 महीनों में गिरा है शेयर : पिछले12-18 महीनों के दौरान इन्फोसिस के शेयर में गिरावट का रुख है। इसकी वजह कारोबारी मांग में सुस्ती, ऑटोमेशन, रुपए की मजबूती के साथ-साथ कॉर्पोरेट गवर्नेंस के आरोप लगना है। बीते शुक्रवार यह 884.40 रुपए के भाव साथ कई साल का निचले स्तर पर गया था। इस साल में शेयर की कीमत करीब 9% और बीते एक साल में 13% कम हुई है। जबकि इस दौरान सेंसेक्स 12% बढ़ा है।

*नासा ने सफलतापूर्वक ट्रैकिंग और रिले Satellite-M लॉन्च किया*
नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने सफलतापूर्वक ट्रैकिंग और डाटा रिले सैटेलाइट-एम (TDRS-M) कक्षा में सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इसे संयुक्त लॉन्च एलायंस (ULA) Atlas-V रॉकेट पर लॉन्च किया गया था।
*✳ट्रैकिंग और डाटा रिले सैटेलाइट-M (TDRS-M)*
TDRS-M नासा के स्पेस नेटवर्क के भाग के रूप में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS), हबल स्पेस टेलीस्कॉप, रॉकेट और अन्य कई अन्य अंतरिक्ष यान के लिए नेविगेशन और उच्च डेटा-दर संचार प्रदान करेगा। 


*✴ट्रैकिंग और डाटा रिले सैटेलाइट सिस्टम (TDRSS)*
TDRSS भौगोलिक संचार उपग्रहों का एक बेड़ा है जो नासा के स्पेस नेटवर्क का हिस्सा है। यह अंतरिक्ष शटल का समर्थन करने के लिए 1980 के दशक में शुरू किया गया था। यह अब भी सेवा में है। 
*✴महत्वपूर्ण तथ्य*
TDRS-M ट्रैकिंग और डेटा रिले सैटेलाइट सिस्टम (TDRSS) की एक श्रृंखला में तीसरे और अगली पीढ़ी का संचार उपग्रह है। 
TDRS-M से पहले, TDRS-K और TDRS-L को क्रमशः जनवरी 2013 और जनवरी 2014 में Atlas-V रॉकेट के जहाज पर लॉन्च किया गया था। 
TDRS बेड़े पृथ्वी पर शोधकर्ताओं को विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान डेटा देने के लिए एक महत्वपूर्ण संबंध है।
*✴नासा की प्रतिक्रिया*
TDRS-M नासा की क्षमताओं का विस्तार करेगा और नासा के अंतरिक्ष नेटवर्क की आयु का विस्तार करेगा, जो अगले दशक में शोधकर्ताओं को मिशन डेटा को प्राप्त करने और ट्रांसमिशन जारी रखने की अनुमति देगा।
 

डॉ. विश्वनाथ कराड एमआईटी (MIT) विश्व शांति विश्वविद्यालय” का उद्घाटन हुआ
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने “डॉ. विश्वनाथ कराड एमआईटी (MIT) विश्व शांति विश्वविद्यालय” का उद्घाटन किया। यह एक स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना निजी क्षेत्र की सहभागिता और निवेश के साथ उच्च शिक्षा में अवसरों को बेहतर बनाने की, राज्य सरकार की योजना का हिस्सा है, यह भारत में इस तरह का पहला विश्वविद्यालय है।
*✳19 अगस्त: विश्व मानवतावादी दिवस*
विश्व मानवतावादी दिवस (WHD) हर साल 19 अगस्त को मानवतावादी सेवा में अपने जीवन को खतरे में लाने वाले श्रमिकों को सहायता करने के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करता है, और दुनिया भर के संकटों से प्रभावित लोगों का समर्थन करने के लिए रैली आयोजित करता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित किया जाता है।
*#सोमालिया….. #पोलियो से #मुक्त #घोषित*
समुद्री लुटेरो से प्रसिद्ध अफ्रीकी देश सोमालिया (राष्ट्रपति -अब्दुला फरमाजो) को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने #पोलियो से मुक्त घोषित कर दिया है… 
जिस पोलियो ग्रस्त राष्ट्र मे पिछले े तीन सालों से पोलिया का कोई नया मामला नही आया होता… डब्लू एच ओ उस राष्ट्र को पोलियो से मुक्त घोषित कर देता है….. 
13 जनवरी 2014 को भारत भी पोलियो से मुक्त घोषित हुआ था |

पोलियो या पोलियोमेलाइटिस विषाणु जनित खतरनाक संक्रामक रोग है, जो कि रोगी के मल से ज्यादातर फैलता है..

 तथा मेरूरज्जु को प्रभावित करता है |