दैनिक समसामयिकी 20 अप्रैल 2018

दैनिक समसामयिकी 20 April 2018(Friday)

1.क्यूबा में नए युग की शुरुआत : कास्त्रो ने डियाज-कैनल को राष्ट्रपति नामित किया
• क्यूबा में मिग्वेल डियाज-कैनल को बृहस्पतिवार को औपचारिक रूप से क्यूबा का राष्ट्रपति चुन लिया गया और इसके साथ ही इस कम्युनिस्ट शासित राष्ट्र में एक नए युग की शुरुआत हो गई। वह राउल कास्त्रो का स्थान ले रहे हैं। पिछले छह दशकों से क्यूबा की सत्ता कास्त्रो बंधुओं के हाथों में थी।
• क्यूबा की क्रांति के बाद फिदेल कास्त्रो ने 1959 से 2006 तक देश का नेतृत्व किया। इसके बाद उनके भाई राउल कास्त्रो ने राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाली।डियाज-कैनल कम्युनिस्ट पार्टी के बड़े नेता हैं जो 2013 से उप राष्ट्रपति थे। क्यूबा की 1959 की क्रांति के बाद पैदा हुए वह देश के पहले राष्ट्रपति होंगे।
• डियाज-कैनल को उनके 58वें जन्मदिन से एक दिन पहले नेशनल असेंबली ने राष्ट्रपति चुना। मतदान का नतीजा घोषित होने के बाद सदन में मौजूद सदस्यों ने तालियां बजाकर नए राष्ट्रपति का अभिवादन किया। राउल कास्त्रो 2006 से राष्ट्रपति थे। वह अपने बड़े भाई फिदेल कास्त्रो के बीमार पड़ने के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी।
• डियाज-कैनल इस चुनाव में एकमात्र उम्मीदवार थे।57 वर्षीय डियाज-कैनल कम्युनिस्ट पार्टी के एक शीर्ष नेता हैं। वर्ष 1959 की क्रांति के बाद जन्मे और देश के राष्ट्रपति बनने वाले डियाज-कैनल द्वीप के 60 साल के इतिहास में ऐसे पहले नेता होंगे, जिनके नाम में कास्त्रो नहीं जुड़ा है।

2. भारत व ब्रिटेन ने चीन को दिया परोक्ष संकेत : हिन्द -प्रशांत क्षेत्र में नौ सैनिक सहयोग बढ़ाने को दोनों देश सहमत
• इंडो-पैसिफिक यानी हंिदू-प्रशांत महासागर का क्षेत्र किस तरह से वैश्विक कूटनीति की दिशा तय कर रहा है यह बात भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन की पीएम टेरीजा मे की अगुवाई में बुधवार को लंदन में हुई द्विपक्षीय वार्ता से भी साबित होती है।
• बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान ने इस बात का ऐलान किया गया कि भारत और ब्रिटेन की नौ सेनाओं के बीच हिन्द -प्रशांत महासागर क्षेत्र में नये सहयोग की शुरुआत होने जा रही है। बयान में जिस तरह से दोनो देशों ने इस क्षेत्र में अपनी शक्ति बढ़ाने में जुटे चीन को निशाने पर लिया है, वह चीन को नागवार गुजर सकता है।
• इसमें कहा गया है कि इंडो-पैसिफिक का क्षेत्र सभी के लिए एक समान तौर पर खुला होना चाहिए। यह भारत, ब्रिटेन और पूरी दुनिया के हित में है। साथ ही इन्होंने कानून सम्मत नौवहन व्यवस्था का पालन करने का आग्रह किया है।
• साफ है कि इशारा किस देश की तरफ है। ब्रिटेन और भारत ने इस क्षेत्र में मालवाहक जहाजों के भी मुक्त परिवहन की बात कही है। साथ ही इन्होंने दो परिपक्व लोकतांत्रिक देशों की तरफ से कानून सम्मत अंतरराष्ट्रीय नौवहन व्यवस्था की बात कही है।
• चीन जिस तरह से साउथ चाइना सी के क्षेत्र में अपनी नौ सैनिक शक्तियां बढ़ा रहा है, उससे पूरी दुनिया में चिंता है। इस क्षेत्र के वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया जैसे छोटे देश दुनिया के अन्य बड़े देशों का मुंह ताक रहे हैं। ऐसे में भारत व ब्रिटेन के बीच बातचीत में इस समुद्री क्षेत्र का जिक्र और यहां सैन्य सहयोग पर वार्ता एक नये गठबंधन का संकेत है।
• यह इस बात को भी बताता है कि किस तरह से भारत यूरोप की दो बड़ी सैन्य शक्तियों यानी फ्रांस व ब्रिटेन के साथ गहरे व मजबूत नौ सैन्य सहयोग के लिए प्रयासरत है। पिछले महीने जब फ्रांस के राष्ट्रपति मैनुएल मैक्रा के साथ पीएम मोदी की रणनीतिक वार्ता में इस समुद्री क्षेत्र में सैन्य सहयोग एक अहम मुद्दा था।
• इस क्षेत्र में पहले से ही भारत-अमेरिका-जापान के बीच साझा रणनीति आगे बढ़ रही है। कई जानकार मानते हैं कि इन तीनों के गठबंधन में आगे चल कर ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस व ब्रिटेन शामिल हो सकते हैं।
• भारतीय विदेश मंत्रलय के सूत्रों का कहना है कि कई लिहाज से ब्रिटेन के साथ नौ सैन्य सहयोग भारतीय रणनीति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कदम होगा। ब्रिटेन अभी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ नौ सैनिक शक्तियों में से एक है। हाल ही में इसने बहरीन में एक स्थाई नौ सैनिक अड्डा तैयार किया है। यहां पर ब्रिटेन अपने सबसे बड़े युद्धक बेड़े को तैनात करने की मंशा रखता है। ताकि आगे चल कर इससे दूसरे साझीदार देशों के साथ अनुभव साझा किया जा सके। ऐसे में भारत के लिए भी भविष्य में ब्रिटेन के इस नौ सैनिक अड्डे के इस्तेमाल का रास्ता निकल सकता है।
• सनद रहे कि ब्रिटेन के इस अड्डे को चीन की ‘स्टिंग आफ पल्र्स’ रणनीति के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। इस रणनीति के तहत चीन खाड़ी के क्षेत्र से लेकर प्रशांत महासागर तक छोटे-छोटे नौ सैनिक अड्डे बना रहा है। भारत अभी तक चीन की इस रणनीति की कोई ठोस काट नहीं निकाल सका है।

3. डोभाल की अध्यक्षता में रक्षा योजना समिति गठित
• केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की अध्यक्षता में एक रक्षा योजना समिति (डीपीसी) का गठन किया है। चीन और पाकिस्तान की ओर से पैदा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और सेना के लिए व्यापक योजना व रणनीति बनाना इस समिति का मुख्य उद्देश्य होगा।
• एनएसए के अलावा विदेश सचिव, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन, थल सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख और वित्त सचिव (व्यय) भी डीपीसी के सदस्य होंगे। अधिकारियों के अनुसार, रक्षा योजना समिति के अध्यक्ष जरूरत पड़ने पर सामरिक रणनीति मामलों के विशेषज्ञों को भी कमेटी में सदस्य के रूप में शामिल कर सकते हैं।1अधिकारियों का कहना है कि डीपीसी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति और सैन्य सिद्धांतों का मसौदा भी तैयारी करेगी।
• इसके अलावा वह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संबंधों के बारे में रणनीति और देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने का काम भी करेगी। डिफेंस प्लानिंग कमेटी रक्षा आयात बढ़ाने की रणनीति पर भी काम करेगी। साथ ही वह सैन्य बलों के लिए क्षमता विस्तार योजनाओं को भी प्राथमिकता देगी। डीपीसी अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट तय समय में सीधे रक्षा मंत्री को सौंपेगी ताकि जरूरत के अनुसार मंजूरी लेने में तेजी आ सके।
• अधिकारियों के मुताबिक, कमेटी रक्षा योजना एवं विदेश नीति की जरूरतों से जुड़े इनपुट्स का विश्लेषण व मूल्यांकन करेगी। साथ ही वह अगले 15 वर्षो के लिए एकीकृत प्लान के तहत रक्षा खरीद बढ़ाने और बुनियादी ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।
• समिति भारतीय रक्षा उद्योग को विकसित करने के साथ उन्नत तकनीकी हासिल करने के लिए उपाय भी करेगी।
• डीपीसी की मदद के लिए कई उपसमितियां भी होंगी, जो विभिन्न विषयों पर उसे सटीक सलाह देंगी। अधिकारियों ने बताया कि नीति एंव रणनीति, योजना एवं क्षमता विस्तार, रक्षा कूटनीति एवं डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इको-सिस्टम के क्षेत्र में इन उपसमितियों का गठन किया जाएगा।

4. रूस से रक्षा खरीद पर भारत पर प्रतिबंध लगाना गलत
• अमेरिका के शीर्ष एडमिरल ने अमेरिकी संसद को भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों पर रूस से रक्षा उपकरण खरीदने पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि ऐसे कदम से भारत-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के सुरक्षा संबंधों पर असर पड़ेगा और उसके सहयोगियों की रूस पर निर्भरता बढ़ेगी।
• अमेरिकी पैसिफिक कमान कमांडर (पीएसीओएम) के लिए नामित एडमिरल फिलिप एस. डेविडसन ने सीनेट की सशस्त्र सेवा कमेटी के समक्ष बुधवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की सेना लंबे समय तक पूर्व सोवियत संघ पर निर्भर रही और अब रूस उसे कुछ तकनीक और प्रशिक्षण दे रहा है। उन्होंने संसद को काउंटरिंग अमेरिकाज एडवरसेरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट (सीएएटीएसए) के तहत रूस से रक्षा उपकरण खरीदने पर भारत पर किसी तरह के प्रतिबंध लगाने को लेकर संबंधों पर बुरा असर पड़ने की चेतावनी दी।
• सीएएटीएसए रूसी रक्षा और खुफिया क्षेत्रों के साथ खरीद-फरोख्त में शामिल देशों पर प्रतिबंध लगाता है। इस कानून के तहत रूस से उच्च कीमत वाले सैन्य रक्षा सामान खासकर अत्याधुनिक एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने पर भारत को प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है। डेविडसन ने कहा कि अमेरिका और पीएसीओएम की मूल प्राथमिकता इस तरह गठबंधन और साङोदारी विकसित करना है कि सभी देश क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता, खुशहाली और शांति के माहौल का लाभ उठाएं।
• उन्होंने कहा कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में रूस के अभियान और मौजूदगी बढ़ते जा रहे हैं। इनमें उसका अपना रणनीतिक हित बढ़ाना और अमेरिकी हित को कम करना शामिल है।

5. फ्रांस को पीछे छोड़कर भारत बना दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था
• भारत फ्रांस को पीछे छोड़कर दुनिया छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। देश की अर्थव्यवस्था आकार 2.6 लाख करोड़ डॉलर (करीब 171.08 लाख करोड़ रुपए) हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक से यह जानकारी सामने आई है।
• इसके मुताबिक दुनिया की पांच अन्य बड़ी इकोनॉमी जिनके नाम भारत से ऊपर हैं उनमें अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन का क्रम है। अप्रैल 2018 के आउटलुक में आईएमएफ ने 2018 में भारत की विकास दर 7.4% रहने और 2019 में 7.8% तक पहुंचने का अनुमान जताया है। यह 2017 में 6.7% रही थी।
• आईएमएफ का कहना है कि जीडीपी के अनुपात में भारत पर बहुत ज्यादा कर्ज है। लेकिन वह सही नीतियों के माध्यम से इसे कम करने का प्रयास कर रहा है। आईएमएफ के वित्तीय मामलों के विभाग के उपनिदेशक अब्देल सेन्हादजी का कहना है कि वित्त वर्ष 2017 में भारत सरकार का कर्ज जीडीपी का 70% रहा।
• भारत अपने राजकोषीय घाटे को 3% और कर्ज के अनुपात को 40% के मध्यम स्तर पर लाने का प्रयास कर रहा है। हमें लगता है कि यह लक्ष्य सही है।’ आईएमएफ का अनुमान है जीडीपी की इस दौड़ में 2018 में फ्रांस भारत को बहुत कम मार्जिन से पीछे छोड़ कर फिर सातवें स्थान पर धकेल देगा।
• भारत इस स्थान पर पिछले कुछ साल से बना हुआ है। आईएमएफ के मुताबिक 2018 में फ्रांस 2.8 लाख करोड़ डॉलर (करीब 190.82 लाख करोड़ रुपए) की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

6. राजधानी में जुटेंगे 31 देशों के लघु उद्यमी
• भारत के लघु उद्योगों को नियंतण्र पहचान दिलाने के लिए देश में पहली बार अंतरराष्ट्रीय लघु उद्योग कन्वेंशन का आयोजन 22 अप्रैल से 24 अप्रैल तक किया जा रहा है। इस कन्वेंशन में 31 देशों के 400 से अधिक लघु उद्यमी शामिल होंगे। इस कन्वेंशन का प्रमुख आकर्षण खादी पर आधारित फैशन शो होगा।
• सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार इस सम्मेलन में 31 देशों के प्रतिनिधियों सहित कुल 400 उद्यमी शामिल होंगे जिनमें लगभग 50 फीसद महिला उद्यमी होंगी। मंत्रालय ने 35 से अधिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार विकास संगठनों सहित लघु उद्योगों के प्रमुख क्षेत्रों से चुनिंदा भारतीय उद्यमियों को आमंत्रित किया है।
• यह पूरा सम्मेलन मेक इन इंडिया पर केन्द्रित होने के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण पर केन्द्रित होगा।बयान के अनुसार मंत्रालय भारतीय उद्यमियों व अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग बनाने, भारत में बने उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देने और निर्यात करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। यह सम्मेलन इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

7. डाकघरों का जल्द बदलेगा चेहरा
• संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने बढ़ते ई-कामर्स कारोबार तथा इससे पार्सल व्यवसाय में बढ़ोतरी के मद्देनजर भारतीय डाक की पार्सल सेवा को गति देने के लिए यहां पार्सल निदेशालय का शुभारंभ किया और कहा कि अगले कुछ महीने में डाकघरों का बदला हुआ चेहरा दिखेगा जो ‘‘न्यू इंडिया’ की अवधारणा पर आधारित होगा।
• श्री सिन्हा ने कहा कि यह निदेशालय सिर्फ पार्सल एवं ई-कामर्स के लिए काम करेगा। यह पूरी तरह से डाक जीवन बीमा निदेशालय और व्यवसाय विकास निदेशालय की तरह कार्य करेगा। पारंपरिक मेल व्यवसाय और विपणन संबंधित कायरें का मौजूदा प्रभागों द्वारा नियांित किया जाना जारी रहेगा।
• उन्होंने कहा कि यह नया निदेशालय भारतीय डाक के व्यवसाय को बढ़ाने और ग्राहकों को किफायती एवं प्रभावी सेवा प्रदान करने के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा। नए संचार माध्यमों के आने से वैश्विक स्तर पर मेल सेवाएं घटी हैं और भारत भी इसका अपवाद नहीं हो सकता है।
• इस बीच पैकेट और पार्सल सेवाओं में तेजी बढ़ोतरी हुई है। इसका मुख्य कारण ई-कॉमर्स है जिसमें एकीकृत संग्रहण, छंटाई, पारेषण और वितरण की जरूरत होती है।

8. ‘‘टाइम 100’ में विराट, दीपिका : कैब सेवा कंपनी ओला के सह संस्थापक भावीश अग्रवाल और भारत में जन्मे माइक्रो सॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला
• कैब सेवा प्रदाता कंपनी ओला के सह संस्थापक भावीश अग्रवाल, हिन्दी फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, क्रि केटर विराट कोहली और भारत में जन्मे माइक्रोसाफ्ट के सीईओ सत्य नडेला टाइम पत्रिका की इस साल की दुनिया की 100 सबसे प्रभावशाली हस्तियों की सूची में शामिल हैं।
• पत्रिका ने कहा, दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की टाइम की वार्षिक सूची उन लोगों की सूची है जिनके बारे में हमारा मानना है कि यह समय उनका है। पत्रिका में अग्रवाल का प्रोफाइल लिखते हुए फ्लिपकार्ट के सह संस्थापक सचिन बंसल ने मुश्किलों से निपटने में अग्रवाल की ‘‘दृष्टि, जुनून और निश्चय’ को रेखांकित किया।
• दीपिका के साथ ‘‘एक्सएक्सएक्स : रिटर्न ऑफ जेंडर केज’ में काम करने वाले हॉलीवुड अभिनेता विन डीजल ने कहा, दीपिका हॉलीवुड में न केवल भारत का बल्कि पूरी दुनिया का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।वहीं क्रि केट के महानायक सचिन तेंदुलकर ने भारतीय क्रि केट टीम के मौजूदा कप्तान कोहली के लिए लिखा कि ‘‘उनकी रनों की भूख और लगातार अच्छा प्रदर्शन’ उल्लेखनीय है तथा यह उनके ‘‘खेल की पहचान’ बन गए हैं।
• बंसल ने अग्रवाल के लिए लिखा कि वह महज 32 साल की उम्र में भारत के उपभोक्ता तकनीक तंत्र के झंडाबरदार हैं। वहीं डीजल ने दीपिका के लिए लिखा कि ‘‘दीपिका दुनिया में हमें मिली सबसे अच्छी चीज हैं। तेंदुलकर ने 2008 में खेला गया अंडर-19 क्रि केट विश्वकप का उल्लेख करते हुए कोहली के लिए लिखा, मैंने तब पहली बार इस युवा, जुनूनी खिलाड़ी को भारत का नेतृत्व करते देखा था। आज विराट कोहली घर घर में जाने जाना वाला नाम हैं और क्रि केट के चैंपियन हैं। उस समय भी रनों की उनकी भूख और लगातार अच्छा प्रदर्शन उल्लेखनीय था, यह उनके खेल की पहचान बन गए हैं।
• वहीं टुलेन यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर और टाइम के पूर्व प्रबंध संपादक वाल्टर इसाकसन ने नडेला के लिए लिखा कि पिछले चार सालों से जब इस कठिन विकेट (माइक्रोसॉफ्ट) पर आएं, माइक्रोसॉफ्ट का बाजार मूल्य 130 प्रतिशत बढ गया। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि कंपनी अब ऐसे उत्पाद बना रही है जो उपयोगकर्ताओं के ज्यादा अनुकूल हैं।
• इस साल की सूची में हॉलीवुड अभिनेत्री निकोल किडमैन, ‘‘वंडर वुमेन ’ फिल्म की अभिनेत्री गैल गडोट, राजकुमार हैरी, उनकी मंगेतर एवं टीवी अभिनेत्री मेगन मार्कल, लंदन के मेयर सादिक खान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनालड ट्रंप, जापानी प्रधानमंत्री ¨शजो आबे, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन , आयरलैंड के भारतीय मूल के प्रधानमंत्री लियो वराडकर, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और गायिका रिहाना भी शामिल हैं।

9. नैनोजाइम्स मारेंगे कैंसरग्रस्त कोशिका
• कैंसर के मरीजों के लिए खुशखबरी है। चीन के वैज्ञानिकों ने इस जानलेवा बीमारी के शर्तिया इलाज का रास्ता खोज लिया है। उन्होंने मरीज की कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को नैनोजाइम्स के जरिये चुन-चुन कर मारने की तकनीक विकसित कर ली है। उनकी इस खोज को कैंसर उन्मूलन की दिशा में पहला अहम कदम बताया जा रहा है।
• न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चाइनिज एकेडमी ऑफ साइंसेज के यान जिऊन और यांगझू यूनिवर्सिटी के गाओ ली जेंग की अगुआई वाली शोधकर्ताओं की टीम ने यह खोज की है। टीम ने ऐसे नैनोजाइम्स विकसित किए हैं, जो न केवल कैंसरग्रस्त कोशिकाओं की शिनाख्त करेंगे बल्कि उन्हें चुन-चुन कर मारेंगे भी। एंजाइम की तरह व्यवहार करने वाले नैनो पदार्थ को ही नैनोजाइम्स कहते हैं।
• हाल के वर्षो में कैंसर की पहचान के लिए इनका व्यापक इस्तेमाल होता है, लेकिन इनके जरिये कैंसरग्रस्त कोशिकाओं के ट्यूमर को खत्म करने की तकनीक पहली बार विकसित हुई है। विज्ञान पत्रिका नेचर ने इस शोध के बारे में विस्तार से छापा है। शोध के अनुसार, ट्यूमर बढ़ने के दौरान उसमें हाइड्रोजन पेरोक्साइड के स्तर में अक्सर बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। इससे बीमारी का इलाज मुश्किल हो जाता है। कीमोथेरेपी का खास असर नहीं होता है।
• वैज्ञानिकों का कहना है कि हाइड्रोजन पेरोक्साइड की ऑक्सीजन से क्रिया कराने पर ऑक्सीजन प्रजातियों का एक जहरीला पदार्थ पैदा होता है, जो ट्यूमर के इलाज में कारगर माना जाता है। पहले चिकित्सक इसके साथ कई प्राकृतिक एंजाइम का भी इस्तेमाल करते थे। लेकिन यह तरीका कारगर नहीं रहा। इसलिए चीनी वैज्ञानिकों की टीम ने पहले एक नैनोजाइम विकसित किया।
• ट्यूमर के इलाज में इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए शोधकर्ताओं ने फिर मानव कोशिका में पाए जाने वाले फेरेटिन प्रोटीन का इस्तेमाल किया। यह नैनोजाइम के सतह को धारदार बनाता है ताकि वह कैंसरग्रस्त कोशिकाओं पर सटीक निशाना साध सके। यान के अनुसार ‘हम उम्मीद करते हैं कि नैनोजाइम आधारित ट्यूमर विधि कैंसर के इलाज में कारगर सिद्ध होगी। और इससे तमाम लोगों को फायदा मिलेगा।’