दैनिक समसामयिकी 21 अगस्त 2017

1.लंबा खिंच सकता है डोकलाम गतिरोध
• डोकलाम में भारत और चीन के सैनिकों के बीच पिछले लगभग दो महीने से जारी गतिरोध से बनी ‘‘नो वार नो पीस’ की स्थिति में दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने से फिलहाल कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है।सिक्किम से लगते भूटान और चीन के ट्राइजंक्शन क्षेत्र डोकलाम में चीन की सड़क बनाने की कोशिशों को भारत द्वारा विफल किए जाने से उत्पन्न गतिरोध ने दोनों देशों के बीच अपेक्षाकृत शांत माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। 

• सीमा पर भले ही लड़ाई की कोई हलचल न दिखाई दे रही हो लेकिन दोनों ओर से किसी भी स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी की बात कही जा रही है।

• जानकारों का कहना है कि चीन और भारत के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के चलते गतिरोध फिलहाल दूर होने की संभावना नहीं दिखाई देती और यह कुछ लंबा ¨खच सकता है। 

• उनका कहना है कि चीन बातचीत के बजाय इस मुद्दे को गीदड़ भभकी से सुलझाने के लिए रोज नए-नए पैंतरे अपना रहा है। चीन के अपेक्षा के विपरीत शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाए जाने के बावजूद भारत इस विवाद का बातचीत के जरिये समाधान करना चाहता है और इसके लिए वह किसी भी मौके को नहीं छोड़ रहा है। 

• रोचक बात यह है कि इस बार घटनाक्रम बदला हुआ है और बार-बार भारतीय सीमाओं का अतिक्रमण करने वाला चीन इस बार उल्टे भारत पर उसकी सीमा का अतिक्रमण करने का आरोप लगा रहा है।भारत ट्राइजंक्शन क्षेत्र से जुड़े विवादों का समाधान संबंधित समझौतों के आधार पर करना चाहता है इसलिए वह इसी के अनुरूप गत 16 जून से पहले की स्थिति बनाए रखने पर जोर दे रहा है। 

• चीनी सैनिकों ने 16 जून को डोकलाम में सड़क बनाने की कोशिश की थी। विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस समस्या का समाधान युद्ध नहीं है और बातचीत से ही हल निकलता है।

• चार साल पहले 2013 में भी वहां चीनी और भारतीय सैनिक आमने-सामने आ गए थे और यह गतिरोध भी करीब 20 दिन चला था। बाद में दोनों पक्षों ने अपने अपने सैनिक एक साथ हटाए थे।

• इस बार भी जब चीन के सैनिकों ने डोकलाम में भारतीय सेना के पुराने बंकरों को नष्ट किया तो भारत ने सीमा संबंधी अलग अलग अवधारणा की वजह से सोच समझ कर विरोध नहीं किया था।

•  बंकरों को नष्ट करने की घटना चीनी सेना द्वारा सड़क बनाने के प्रयास के दस दिन पहले की है।

•  मौजूदा गतिरोध भी दोनों देशों के स्थानीय कमांडरों द्वारा हल किया जा सकता था लेकिन इसमें तीसरे देश भूटान के लिप्त होने और मामला पेइचिंग एवं नई दिल्ली चले जाने की वजह से उलझ गया और इसमें अनेक नए आयाम जुड़ गए।

• डोकलाम में सैन्य संघर्ष की संभावना नगण्य है क्योंकि भारतीय सेना की पोजीशन बहुत अच्छी है। वहां चीनी सेना ज्यादा कुछ करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए इस गतिरोध का भी समाधान यही होगा कि दोनों देशों की सेनाएं वहां से हट जाएं।

•  अब इस मामले में दोनों देशों में राष्ट्रीय गौरव की भावना जुड़ गई है। कोई भी पक्ष जनता की नारों में पराजित नहीं दिखना चाहेगा। इसलिए इस मसले के समाधान में अभी समय लगेगा।
2. चीन -पाक आर्थिक गलियारा भारत के लिए चिंताजनक
• चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) सहित चीन एवं पाकिस्तान के बीच बढ़ते साठगांठ पर चिंता व्यक्त करते हुए संसद की एक समिति ने कहा है कि सीपीईसी का कुछ हिस्सा पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है और यह भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए चिंताजनक है।

• लोकसभा में हाल ही में पेश भारत पाक संबंधों पर विदेश मामलों संबंधी संसद की एक समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, सैन्य परमाणु और मिसाइल विकास कार्यक्म तथा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठनों पर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध लगने से रोकने समेत चीन एवं पाकिस्तान के बीच बढ़ती सांठगांठ के कारण क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति है। 

• रिपोर्ट में कहा गया है कि सीपीईसी का कुछ हिस्सा पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है जो भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है और उस पर पाकिस्तान ने अनाधिकृत कब्जा किया है। यह भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए चिंताजनक है।
3. ऑस्ट्रेलिया में दोहरी नागरिकता वाले सात सांसद, सरकार पर संकट
• ऑस्ट्रेलिया में दोहरी नागरिकता वाले सांसदों का एक और मामला सामने आया है। इस मामले को भी जांच के लिए उच्च न्यायालय भेज दिया गया है। शनिवार शाम सीनेटर निक शिनोफोन ने अपने पास ब्रिटेन की भी नागरिकता होने की घोषणा की थी। इससे प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल की सरकार पर संकट गहरा गया है।

• सरकार की परेशानी पिछले हफ्ते ही तब बढ़नी शुरू हो गई थी जब उप प्रधानमंत्री बार्नाबाइ ज्वॉइस ने कहा कि वह संसद की सदस्यता के लिए अयोग्य हो सकते हैं क्योंकि उनके पास न्यूजीलैंड की भी नागरिकता है। 

• फिलहाल ज्वॉइस भी इस मामले में न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के 116 साल पुराने कानून के मुताबिक निर्वाचित सांसद के पास केवल आस्ट्रेलिया की नागरिकता होनी चाहिए। इस कानून के तहत ही शिनोफोन समेत तीन सरकारी सदस्यों और तीन ग्रीन पार्टी के सदस्य दोहरी नागरिकता के दोषी पाए गए हैं। 

• शिनोफोन को अपनी मां से ग्रीसकी भी नागरिकता मिली थी जिसका उन्होंने काफी पहले त्याग कर दिया था।
4. विलफुल डिफॉल्टरों पर बैंकों के 92 हजार करोड़ रुपए बकाया, 27% एसबीआई के
• सरकारी बैंकों का विलफुल डिफॉल्टर्स पर जितना बकाया है उसका 27 फीसदी अकेले एसबीआई का है। 31 मार्च तक के आंकड़ों के मुताबिक एसबीआई को 1,762 विलफुल डिफॉल्टर्स से कुल 25,104 करोड़ रुपए वसूलने हैं। पंजाब नेशनल बैंक दूसरे नंबर पर है। 

• उसके 1,120 विलफुल डिफॉल्टर्स पर 12,278 करोड़ रुपए बकाया हैं। जानबूझकर कर्ज अदा नहीं करने वालों पर इन दोनों बैंकों के 37,382 करोड़ रुपए बकाया हैं। यह सरकारी बैंकों के कुल विलफुल डिफॉल्ट के 40% के बराबर है। 

• एसबीआई और इसके पांच सहयोगी बैंकों समेत 27 सरकारी बैंकों के विलफुल डिफाॅल्टर्स पर कुल 92,376 करोड़ रुपए बकाया हैं। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च को खत्म वित्त वर्ष के दौरान इसमें 20.4% का इजाफा हुआ है। 

• 2015-16 तक यह आंकड़ा 76,685 करोड़ रुपए था। इसी अवधि में विलफुल डिफॉल्टर्स की संख्या करीब 10 फीसदी बढ़ी है। यह पिछले साल 31 मार्च तक 8,167 थी, इस साल 31 मार्च तक बढ़कर 8,915 तक पहुंच चुकी है। 

• विलफुल डिफॉल्ट को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ने नियम सख्त किए हैं। इसने साफ किया है कि डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों के प्रमोटर जिम्मेदारी से बच नहीं पाएंगे। 

• पहले बैंक, किसी कंपनी के नॉन-होलटाइम डायरेक्टर को उस समय तक विलफुल डिफॉल्टर घोषित नहीं कर सकते थे जब तक उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हों कि उस डायरेक्टर को कंपनी द्वारा जानबूझकर कर्ज अदा नहीं किए जाने के बारे में जानकारी थी और उसने कंपनी की इस प्रवृत्ति पर कोई आपत्ति नहीं जताई। 

• आरबीआई ने बैंकों को ऐसे डिफॉल्टरों के नाम और फोटो प्रकाशित करने की अनुमति भी दी है।
5. 5 साल में पाकिस्तान ने 298 भारतीयों को दी अपनी नागरिकता
• पाकिस्तान ने पिछले पांच सालों में 298 अप्रवासी भारतीयों को अपनी नागरिकता दे दी है। आंतरिक मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में शनिवार को बयान जारी करते हुए यह जानकारी दी। पाकिस्तान मुस्लिम लीग के शेख रोहेल असगर ने  ने संसद में  सवाल उठाया था कि पिछले पांच सालों में कितने अप्रवासी भारतीयों को पाकिस्तानी नागरिकता दी गई है। 

• ट्रिब्यून एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय की ओर से 2012 में 48 लोगों को पाक की नागरिकता दी गई थी। 2013 में यह संख्या बढ़कर 75 और 2014 में 76 रही। 2015 में सबसे कम 15 वहीं 2016 में 69 और इस साल अप्रैल तक 15 भारतीयों को पाक की नागरिकता मिली है। 

• माना जाता है कि पाकिस्तान ऐसा देश है जहां पर नागरिकता मिलना हमेशा मुश्किल रहा है। इंडिया, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और वर्मा के तमाम अप्रवासी यहां वर्षों से रह रहे हैं लेकिन उन्हें अभी तक नागरिकता नहीं मिल पाई है। 

• नागरिकता को लेकर यहां एक बड़ा मामला भी प्रकाश में आया है। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसर पाकिस्तान में एक ऐसी भारतीय महिला को भी नागरिकता दी गई जिसका नागरिकता के लिए प्रार्थना पत्र 2008 से लंबित पड़ा था। इस महिला ने पाकिस्तानी नागरिक से शादी की थी। 

• पति की मौत के बाद उसके सौतेले बेटों ने उसे घर और संपत्ति से बेदखल कर दिया था। पिछले साल मार्च में पूर्व आंतरिक मामलों के मंत्री चौधरी निसार अली खान के आदेश पर उसे नागरिकता मिल सकी। 
6. मोसुल के बाद इराकी फौज की नजर ‘ताल अफर’ पर
• आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) से मुल्क के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल को मुक्त कराने के बाद इराक की फौज अब ताल अफर से उसे खदेड़ने में जुट गई है। इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी ने रविवार को एलान किया कि ताल अफर को आइएस से मुक्त कराने की लड़ाई शुरू हो गई है। यह उत्तरी इराक में आइएस के बचे प्रमुख गढ़ों में से एक है।

• मोसुल में आइएस के खिलाफ जीत की घोषणा के महीने भर बाद प्रधानमंत्री ने टीवी संबोधन में कहा, ताल अफर को मुक्त कराने का ऑपरेशन शुरू हो गया है। मैं आइएस आतंकियों से कह रहा हूं कि उनके पास शहर छोड़ने या मारे जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हम लड़ाई जीतते जा रहे हैं और वे हारते जा रहे हैं। देश की सेना के साथ पूरी दुनिया खड़ी है।’ ताल अफर मोसुल से करीब 70 किमी दूर है।

• यह शहर जून, 2014 से आइएस के कब्जे में है। उस समय शहर की आबादी दो लाख के करीब थी लेकिन अब वहां की आबादी का अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि लोगों का पलायन लगातार जारी है। अधिकारियों का अनुमान है कि शहर में करीब एक हजार आतंकी हो सकते हैं। 

• वे इराकी और गठबंधन बलों के हमले की स्थिति में शहर के लाेगों को अपने बचाव के लिए ढाल बना सकते हैं। इससे पहले अमेरिका समर्थित इराकी बलों ने जुलाई में मोसुल को आइएस से मुक्त करा लिया था। इसके लिए पिछले साल अक्टूबर से बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चल रहा था।
7. 400 अरब डालर को छू सकता है विदेशी मुद्रा भंडार
• देश का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर तक 400 अरब डालर पर पहुंच सकता है। मोर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पूंजी का प्रवाह बढ़ने और ऋण के कमजोर उठाव से विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा।

• वैश्विक  वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनी के अनुसार देश का विदेशी मुद्राभंडार अपने सर्वकालिक उच्चस्तर पर है और 2015 से यह काफी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। 

• 4 अगस्त को देश का विदेशी मुद्रा भंडार 393 अरब डालर के रिकार्ड उच्चस्तर पर पहुंच गया। मोर्गन स्टेनली के शोध नोट में कहा गया है कि यदि विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि की दर पिछले चार सप्ताह की तरह की रहती है तो 8 सितंबर, 2017 को यह 400 अरब डालर पर पहुंच जाएगा। 

• नोट में कहा गया है कि पिछले 12 माह में जापान को छोड़कर एशिया में विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे अधिक वृद्धि भारत में हो रही है। 

• मोर्गन स्टेनली का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह पूंजी का सतत प्रवाह और ऋण का कमजोर उठाव है।
8. हाइड्रो पावर की चौदह परियोजनाएं अटकीं
• सौर ऊर्जा की दर तीन रपए प्रति यूनिट तक फिसल जाने से निवेशकों का रुझान हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से हटकर सौर ऊर्जा परियोजनाओं की तरफ हो गया है जिसकी वजह से भी ये परियोजनाएं अटक गई हैं

पनबिजली क्षेत्र के लिए प्रस्तावित प्रोत्साहन योजना के बावजूद अटकी पड़ी पनिबजली परियोजनाओं को चालू करने को लेकर चिंता बरकरार है। 

• केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के एक अधिकारी ने यह बात कही।सीईए के अधिकारी ने कहा, प्रस्तावित प्रोत्साहन पैकेज के बाद भी विभिन्न कारणों से परियोजनाओं की सफलता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसीलिए हम फिलहाल ऐसी परियोजनाओं को लक्ष्य कर रहे हैं जो अग्रिम अवस्था में है यानी जिनमें 70-80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 

• पर्यावरण संबंधी बाधाओं, सौर बिजली जिसमें शुल्क घटकर तीन रपए प्रति यूनिट तक पहुंच गई है, जैसे बेहतर विकल्प के कारण निजी निवेशकों की पनबिजली परियोजनाओं को लेकर रुचि कम हुई है।देश में 14 पनबिजली परियोजनाएं अटकी हुई है। 

• इन परियोजनाओं की कुल क्षमता 10,000 मेगावाट है और करीब 26,000 करोड़ रपए का निवेश जुड़ा है। राजकोषीय लाभ के अलावा सरकार पनबिजली परियोजनाओं की कितनी भी क्षमता क्यों न हो, उन्हें अक्षय उर्जा का दर्जा देने पर विचार कर रही है।
9. अल्पसंख्यकों के लिए खुलेंगे नवोदय जैसे विशेष स्कूल
• नवोदय विद्यालय की तर्ज पर सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के लिए विशेष स्कूल खोलने जा रही है। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि इससे इन लोगों को बेहतरीन शिक्षा दी जा सकेगी। सरकार इनमें लड़कियों के लिए 40 फीसद सीटें आरक्षित रखेगी।

• ग्रामीण क्षेत्रों में नवोदय विद्यालय सरकार ने खोल रखे हैं। इनमें मुफ्त भोजन के साथ गुणवत्ता परक शिक्षा दी जा रही है। सरकार इस तर्ज पर 105 स्कूल खोलेगी। इनमें 100 स्कूल नवोदय की तर्ज पर अल्पसंख्यक बहुल्य इलाकों में खोले जाएंगे, जबकि इस समुदाय के लोगों के लिए पांच अन्य शैक्षणिक संस्थान खोलने पर विचार चल रहा है। 

• मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन (एमएईएफ) को सरकार ने सर्वे की जिम्मेदारी दी थी। फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में मुस्लिम समुदाय को विशेष तौर पर ध्यान में रखते हुए इसके साथ बौद्ध, ईसाई, सिख, पारसी व जैन समुदाय के लोगों के बीच शिक्षा का स्तर सुधारने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई थी। 

• सरकार ने इसी दिशा में स्कूल खोलने का फैसला किया है। भारत में छह समुदाय अल्पसंख्यक हैं, जिनमें का पता लगाना था। शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक त्रिस्तरीय योजना पर काम करने के जरूरत है। 

• नकवी का कहना है कि राजस्थान व उत्तर प्रदेश की सरकार ने उच्च शिक्षा के लिए संस्थान खोलने पर सहमति जताई है। उनका कहना है कि इन्हें अगले साल से शुरू किया जा सकता है। एमएसडीपी कार्यक्रम के तहत बनाए गए भवनों में इन्हें खोला जाएगा।
10. नौवहन पण्राली गगन को जल्द लागू करने की तैयारी
• सरकार की अनुशंसा के मद्देनजर समुद्र संबंधी नियामक ने स्वदेश निर्मित नौवहन पण्राली गगन को लागू करने संबंधी र्चचाएं शुरू कर दी हैं। एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी। पोत परिवहन में महानिदेशक मालिनी शंकर ने कहा, हमने सभी पक्षकारों से बातचीत शुरू कर दी है और रोडमैप को परिभाषित किया जा रहा है। 

• उन्होंने बताया कि जुलाई 2015 में गगन लांच करने के बाद से सरकार यह देख रही है कि इस पण्राली को कहां-कहां लागू किया जा सकता है और समुद्री क्षेत्र में इसे लागू करना इसी कवायद का हिस्सा है। वर्तमान में अमेरिकी और रूसी पण्रालियों का इस्तेमाल किया जाता है। 

• हालांकि गगन को अपनाना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि इसके लिए कई तरह की मंजूरियों और काफी अधिक निवेश की जरूरत होगी। सूत्र बताते हैं कि सबसे पहले गगन के लिए इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन की मंजूरी की आवश्यकता होगी। 

• उन्होंने बताया कि जिन अन्य देशों के पास अपनी खुद की जीपीएस नेविगेशन पण्रालियां हैं उन्हें यह मंजूरी मिलने में दो वर्ष तक का वक्त लगा था। गगन को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने 774 करोड़ रपए के निवेश से संयुक्त रूप से विकसित किया था।
11. पांच वर्षो में 30 करोड़ टन दूध उत्पादन का लक्ष्य
• देश में एक बार फिर से दूध दही की नदियां बहाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने एक नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। सरकार की योजना है कि देश में हर साल दस करोड़ गाय-भैंस पैदा की जाएं जिससे आने पांच वषों में देश में दूध का उत्पादन 30 करोड़ टन हो जाए। 

• हालांकि अब भी भारत दुनिया में सबसे ज्यादा दुग्ध उत्पादन वाला देश है। लेकिन मोदी सरकार चाहती है कि देश में रिकार्ड तोड़ दूध का उत्पादन हो। अब भी भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा दुग्ध पशु हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इससे संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए उन्होंने फैसला किया है कि हर साल दस करोड़ कृत्रिम गर्भाधान हों। कृषि मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। 

• राष्ट्रीय गोकुल मिशन के द्वारा इस काम को अंजाम दिया जा रहा है।कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से आनुवांशिक क्षमता में वृद्धि की जाती है। इससे दुग्ध उत्पादन को बढ़ाया जाता है। मंत्रालय ने हर राज्य के लिए लक्ष्य निर्धारित किए हैं। 

• उत्तर प्रदेश के लिए सबसे ज्यादा एक करोड़ 19 लाख 20 हजार का कृत्रिम गर्भाधान लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तमिलनाडु के लिए एक करोड़ नौ लाख, कर्नाटक के लिए एक करोड़ तीन लाख और गुजरात के लिए एक करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नए राज्यों के लिए यह लक्ष्य एक करोड़ से कम है।

•  उल्लेखनीय है वर्ष 1998 से ही भारत दुनिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश है।

• 1950 में देश में 17 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता था जो कि 2015-16 में 163 मिलियन टन हो गया। मोदी सरकार अब अगले पांच वषों में 30 करोड़ टन दूध का उत्पादन करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।

• सरकार की कोशिश है कि देश में दो से पांच किलो प्रतिदिन दूध देने वाली 40 प्रतिशत गायों पर फोकस किया जाए और कृत्रिम गर्भाधान के द्वारा इनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाए। सरकार का मानना है कि इससे न केवल देश में दूध का उत्पादन बढ़ेगा बल्कि इस योजना से देश के किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
12. तीसरी पीढ़ी की मिसाइल प्रणाली से लैस होगा टी-90 युद्धक टैंक
• सेना टी-90 मुख्य युद्धक टैंकों को तीसरी पीढ़ी की मिसाइल प्रणाली से लैस कर और ताकतवर बनाने जा रही है। इस समय टी-90 टैंक लेजर निर्देशित आईएनवीएआर मिसाइल प्रणाली से लैस हैं। सेना के सूत्रों ने कहा कि इसकी जगह पर तीसरी पीढ़ी की मिसाइलें लगाने का फैसला लिया है। 

• इस प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज के मुताबिक, “मौजूदा आईएनवीएआर मिसाइल का डिजाइन रेंज और लक्ष्य की गहराई (डीओपी) के लिहाज से अधिकतम सीमा तक तैयार किया गया है। ऐसे में उसे अगली पीढ़ी की मिसाइलों के लिए उन्नत करना जरूरी है।’ मिसाइल लक्ष्य पर निशाना साधने में कितनी दूरी तक जा सकती है उसे डीओपी कहते हैं। 

• रूस निर्मित टी-90 टैंक भारतीय सेना के आक्रामक हथियारों का मुख्य आधार है। सूत्रों ने बताया कि तीसरी पीढ़ी की मिसाइल को 800-850 एमएम की डीओपी हासिल करनी चाहिए और वह दिन के साथ-साथ रात में भी 8 किलोमीटर की दूरी तक के लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम होगी। सूत्रों ने बताया कि यह मिसाइलें स्थिर लक्ष्यों के साथ गतिशील लक्ष्यों को भेदने में भी सक्षम होंगी। 

• सेना के लिए युद्ध क्षेत्र ऊंचाई वाले हैं। ऐसे में इन टैंकों को ऊंचाई पर होने वाली लड़ाई के लिए भी ज्यादा ताकतवर बनाया जा रहा है। इसके लिए इनमें मॉड्यूलर इंजन लगाने की परियोजना पर काम हो रहा है। क्षेत्र में उभरते सुरक्षा परिदृश्यों पर विचार करते हुए सरकार ने सेना की आक्रमण क्षमता बढ़ाने के लिए पिछले कुछ महीनों में कई कदम उठाए हैं।