दैनिक समसामयिकी 23 अप्रैल

1.चालू वित्त वर्ष में साढ़े सात फीसद रहेगी भारत की ग्रोथ
• उभरती अर्थव्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं। ग्लोबल ग्रोथ में इनका योगदान 75 फीसद से ज्यादा है। भारत ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ का प्रमुख इंजन है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गर्वनरों की बैठक में ये बातें कहीं। 

• उन्होंने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 7.5 फीसद रहने की उम्मीद है। यह वित्त वर्ष 2016-17 में 7.1 फीसद थी।1संरचनात्मक सुधार संबंधी उपायों का जिक्र करते हुए जेटली बोले कि महंगाई की निचली दर और कम चालू खाते के घाटे के साथ भारत की विकास दर लचीली रही है। 

• बैठक में चर्चा के केंद्र में वित्तीय क्षेत्र का विकास व विनियमन, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना और ग्लोबल वित्तीय प्रशासन थे। जेटली ने बताया कि जुलाई, 2017 से भारत में वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लाने की तैयारी है। इससे करों की बहुलता समाप्त होगी। यह भारत को एक समान बाजार बना देगा। 

• अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) के अनुमानों के अनुसार, मध्यम अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि दर आठ फीसद से ऊपर जा सकती है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार कई बहुआयामी सुधारों पर विचार कर रही है। इससे सुनिश्चित किया जा सकेगा कि भारत ग्लोबल अर्थव्यवस्था की अस्थिरता का सामना कर पाए। साथ ही साथ आर्थिक बढ़ोतरी की रफ्तार को सुनिश्चित कर सके। 

• जेटली बोले कि अमीर देशों को अब भी कुछ बड़ी जिम्मेदारियों और दायित्वों को निभाना है। उनमें अपने संसाधनों का उपयोग करते हुए बहुपक्षवाद को समर्थन देना व गरीब देशों के विकास की खातिर नीतियों और कार्यक्रमों की फंडिंग को बाधामुक्त बनाने के लिए विश्व बैंक जैसे संस्थानों को सक्षम बनाना शामिल हैं। 

• नोटबंदी के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि यह कदम भारत को कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था बनाएगा। इससे कर अनुपालन में बढ़ोतरी होगी। जाली मुद्रा का खतरा कम होगा। जेटली अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की सालाना बैठक के अलावा अन्य संबंधित कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका के औपचारिक दौरे पर हैं। उनके साथ आरबीआइ के गवर्नर उर्जित पटेल, आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास और मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रrाण्यम भी गए हुए हैं।
*2. आज उभरेगी नए भारत की तस्वीर
• देश के आर्थिक विकास के 15 वर्षीय विजन डाक्यूमेंट पर रविवार को नीति आयोग की बैठक में चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में जीएसटी भी चर्चा का एक अहम विषय रहेगा। चूंकि जीएसटी को पहली जुलाई से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है इसलिए प्रधानमंत्री बैठक में उपस्थित होने वाले मुख्यमंत्रियों को राज्य जीएसटी कानून जल्द पारित कराने को कह सकते हैं।

• वैसे यह बैठक देश के आर्थिक विकास के लिए तैयार किए गए 15 वर्षीय विजन डाक्यूमेंट पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पानगढ़िया बदलते भारत की तस्वीर का एक प्रजेंटेशन देंगे। 

• इसमें सात साल के लिए सरकार की रणनीति का उल्लेख होगा। इसके साथ ही पानगढ़िया तीन साल के एक्शन प्लान का ब्योरा भी आयोग के सदस्यों के समक्ष रखेंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों की आमदनी को दोगुना करने का नुस्खा बताएंगे। 

• बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई मुख्यमंत्रियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। इस बार यह बैठक नीति आयोग में न होकर राष्ट्रपति भवन में हो रही है। इसके अतिरिक्त बैठक में युवाओं के लिए रोजगार सृजन करने संबंधी नीति तैयार करने पर भी चर्चा होगी। नीति आयोग रोजगार सृजन के लिए तीन वर्ष का कार्यक्रम तैयार करेगा। रोजगार बढ़ाने की इस कार्ययोजना पर चर्चा करेगा।
*3. टलेगी जीएसटी की समय सीमा
• केंद्र सरकार की पूरी कोशिश है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को देश भर में 1 जुलाई से लागू कर दिया जाए। लेकिन इसकी समयसीमा को बढ़ाकर सितंबर से लागू करने का विकल्प भी खुला रखा है। 

• सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक अगर जीएसटी से संबंधित केंद्र, राज्यों, जीएसटी नेटवर्क और निजी क्षेत्र की तैयारियां समय पर पूरी नहीं हो पाई तो इसे लागू करने की तिथि को आगे बढ़ाने का भी निर्णय किया जा सकता है।

• हालांकि केंद्र सरकार ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम सहित कुछ अन्य लोगों की उस सलाह को दरकिनार कर दिया, जिसमें जीएसटी को 1 अक्टूबर से लागू करने का सुझाव दिया गया था। जीएसटी के लिए संविधान संशोधन को संसद की मंजूरी मिलने के बाद पिछले साल 16 सितंबर को अधिसूचित कर दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि मौजूदा अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था इस तिथि से अगले एक साल तक के लिए जारी रह सकती है। लेकिन सरकार इस बात को लगातर कहती रही है कि जीएसटी को इस
साल 15 सितंबर से पहले लागू किया जाएगा।

• अधिकारी ने कहा, ‘संविधान के तहत हमें सितंबर तक का समय मिला है। हमारा लक्ष्य इसे 1 जुलाई को लागू करने का है क्योंकि अगर तैयारी में कोई कसर बाकी रह जाए तो उसे पूरा करने के लिए हमारे पास दो माह का वक्त बचा रह सके। 

• यही वजह है कि यह विकल्प (सितंबर तक लागू करने) खुला रखा गया है।’ जीएसटी के क्रियान्वयन से जुड़े सूत्र ने कहा कि अगर इसे किसी वजह से सितंबर के लिए टाला गया तो उसका निर्णय 1 जुलाई के आसपास किया जा सकता है।

• चिदंबरम ने बार-बार तय समयसीमा पर सवाल उठाए हैं और इसे अव्यावहारिक बताते रहे हैं। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद द्वारा मध्य मई में दरें तय करने के बाद उसे सार्वजनिक किया जाएगा। 

• यह भी संभव है कि व्यापारियों और विनिर्माताओं के बीच कुछ वस्तुओं और उसकी दरों को लेकर आपत्ति हो सकती है, जिस पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इसकी भी उम्मीद है कि दरों को संशोधित करने के लिए उसे संसद में लाया जा सकता है।

• इसके साथ ही देश भर में नई कर व्यवस्था के लिए खुद को तैयार करने के लिए ज्यादा समय की जरूरत होगी। अधिकारी ने कहा, ‘अक्टूबर में अगर इसे लागू किया जाता है तो संविधान में फिर से संशोधन करना होगा, जिस पर हम विचार नहीं कर रहे हैं।’

•  विश्लेषकों का कहना है कि सितंबर तक इसे टाले जाने की संभावना है लेकिन 1 जुलाई लागू करने के लिए आदर्श है। खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर अभिषेक रस्तोगी ने कहा, ‘अगर सरकार अभी से ही इसे सितंबर तक टालने की घोषणा करती है तो कई राज्य इसे लेकर बेपरवाह हो सकते हैं। लेकिन राज्यों पर इसे जल्द लागू करने के लिए दबाव डालने की जरूरत है।’
*4. रिजर्व बैंक की बैठक के ब्योरे से नीतिगत दर में वृद्धि के संकेत : नोमुरा*
• रिजर्व बैंक की इस महीने हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक के ब्योरे से यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक आने वाले समय में संभवत: नीतिगत दर में वृद्धि करेगा। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। 

• जापान की वित्तीय सेवा कंपनी नोमुरा के अनुसार सभी सदस्यों ने मूल मुद्रास्फीति को लेकर चिंता जताई और कहा कि नोटबंदी के कारण महंगाई दर में जो कमी आई है, वह अस्थाई होगी। मौद्रिक नीति समिति की बैठक के ब्योरे को कल सार्वजनिक किया गया। 

• कुल मिलाकर ब्योरे से यह पता चलता है कि समिति में सदस्यों की राय अलग-अलग बढ़ रही है। छह सदस्यों में दो नीतिगत दर में वृद्धि के पक्ष में दिखे। नोमुरा ने एक शोध रिपोर्ट में कहा, ‘बहुसंख्यक एमपीसी सदस्यों ने मुद्रास्फीति में वृद्धि के जोखिम की बात कही और अब 2018 में रेपो में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।’

• रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीिय मौद्रिक नीति समिति ने 6 अप्रैल को द्विमासिक मौद्रक नीति समीक्षा में रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया। नोमुरा का मानना है कि दूसरी तिमाही में मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत पर नरम बनी रहेगी लेकिन 2017 की चौथी तिमाही 2018 की पहली छमाही में उत्पादन अंतर कम होने, ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी बढ़ने तथा प्रतिकूल तुलनात्मक आधार जैसे कारणों से यह 5.5 से 6 प्रतिशत हो जाएगी। 

• रिपोर्ट के अनुसार, ‘इसीलिए हमने नीति के मामले में रुख में बदलाव किया है और अब 2018 में संचई रूप से 0.50 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। इसमें 0.25 प्रतिशत 2018 की दूसरी तिमाही तथा 0.25 प्रतिशत तीसरी तिमाही में होगी।’