दैनिक समसामयिकी 26 अप्रैल 2017

1.अफगानिस्तान में रूस के नए पैंतरे से भारत की चिंता बढ़ी*

• कूटनीति में न तो कोई स्थायी मित्र है और न ही दुश्मन। लेकिन भारत का बेहद पुराना व विश्वसनीय मित्र रूस, अफगानिस्तान में नई पैंतरेबाजी में जुटा है। उसके कदम हर लिहाज से भारतीय हितों के खिलाफ हैं। पाकिस्तान व चीन के साथ मिल कर तालिबान को अफगान शांति वार्ता में शामिल करने की कोशिश करने वाले रूस पर अब तालिबान को हथियारों की आपूर्ति करने का आरोप है। भारत इससे चिंतित है। 
• संकेत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच हफ्ते बाद मास्को में जब द्विपक्षीय वार्ता के लिए राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे तो उनके बीच तालिबान का मुद्दा निश्चित तौर पर उठेगा।1तालिबान लड़ाकों ने पिछले शनिवार को अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में एक सैन्य टोली पर हमला कर 140 अफगानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया है। 
• यह अफगानी सैनिकों पर तालिबान की तरफ से किया गया अभी तक का सबसे बड़ा हमला है। इस हमले के लिए भारत व अफगानिस्तान ने तालिबान को पाकिस्तान की तरफ से मिल रही मदद को मुख्य तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन यह सूचना भी आई है कि रूस भी तालिबान को नए सिरे से हथियारों की आपूर्ति करने लगा है। 
• अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने भी रूस की तरफ से तालिबान की दी जाने वाली सैन्य मदद से इन्कार नहीं किया है। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि तालिबान को बढ़ावा देने के पीछे रूस की दो-तीन मंशा दिखती है। पहली बात तो यह कि इससे वह अमेरिका के लिए अफगानिस्तान में परेशानी पैदा करना चाहता है। 1चीन व पाकिस्तान के साथ मिल कर रूस, अफगानिस्तान में अमेरिका की अगुवाई में हो रहे शांति प्रयासों को कुंद करना चाहता है। 
• वजह जो भी हो लेकिन तालिबान को मिल रहे रूसी सहयोग पर पाकिस्तान को खुशी होगी। पाकिस्तान भी चाहता है कि अफगानिस्तान में किसी भी सूरत में तालिबान को सत्ता में लौटने का मौका मिले। सनद रहे कि पिछली बार जब अफगानिस्तान में तालिबान का शासन था तब उसे मान्यता देने वाला एकमात्र देश पाकिस्तान था। 
• ऐसे में भारत को भी अफगान को लेकर अपनी नीति में माहौल के हिसाब से बदलाव करना होगा। भारत व रूस के बीच अफगानिस्तान में शांति को लेकर पहले भी बात होती रही है। इस बार बिल्कुल नए संदर्भ में बात होगी। तालिबान की बढ़त से पूरे दक्षिण एशिया में माहौल खराब होने और विश्व शांति पर इसके खतरे का मुद्दा भारत उठाएगा।
*2. भारत के कड़े रुख के बाद अमेरिका का रुख नरम*
• एच-1बी वीजा मसले पर भारत के कड़े तेवर के बाद अमेरिका के रुख में नरमी आई है। उसने कहा है कि भारतीय कंपनियों का अमेरिका में निवेश है और वह दोनों पक्षों के बीच मजबूत आर्थिक रिश्ते बनाये रखना चाहता है। 
• वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले दिनों अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन न्यूचिन के साथ बातचीत में वीजा मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।1अमेरिकी विदेश विभाग के कार्यवाहन प्रवक्ता मार्क टोनर ने न्यूज कांफ्रेंस में कहा कि हम भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत होते देखना चाहते हैं। यह जवाब उन्होंने ट्रंप प्रशासन द्वारा वीजा व्यवस्था की समीक्षा किये जाने पर पूछे गये सवाल पर दिया। 
• इससे भारतीय आइटी कंपनियों पर खासा असर पड़ सकता है। भारतीय आइटी कंपनियां अमेरिकी वीजा पर काफी ज्यादा निर्भर हैं। टोनर ने कहा कि हम अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय कंपनियों के निवेश को अत्यंत अहम मानते हैं। इससे अमेरिका में नौकरियां पैदा करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि हम वीजा संबंधी नई शर्तो को अहम मानते हैं। देखना होगा कि वीजा शर्तो में क्या बदलाव हुआ है।

 

• अमेरिका वीजा इंटरव्यू और मंजूरी की प्रक्रिया को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। शुरू से ही ट्रंप प्रशासन की यह नीति रही है। निश्चित ही हम इस नीति में प्रवासियों और शरणार्थियों का सम्मान करेंगे। वीजा प्रक्रिया में बदलाव का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि यह निरंतर प्रक्रिया है। जेटली ने पिछले शनिवार को अमेरिकी दौरे के समय अमेरिकी वित्त मंत्री के साथ बातचीत में मजबूती से उठाया था। 
• उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय कंपनियों के योगदान का प्रमुखता से उल्लेख किया था। उन्होंने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस के साथ बैठक में भी इस मसले पर चिंता उठाई थी। पिछले दिनों अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय आइटी कंपनियों जैसे टीसीएस, इन्फोसिस और कग्निजेंट पर ज्यादा वीजा हासिल करने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन जमा कराने का आरोप लगाया था। 
• इसके बाद आइटी उद्योग के संगठन नैस्कॉम ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। अमेरिका में वीजा को लेकर सख्ती पर भारतीय आइटी कंपनियां काफी चिंतित हैं। उन्हें आशंका है कि इससे उनका बिजनेस मॉडल प्रभावित होगा। गौरतलब है कि भारतीय आइटी निर्यात में अमेरिका का योगदान 60 फीसद के आसपास होने के कारण वीजा पर

*3. नया विकलांगता कानून लागू करें : सुप्रीम कोर्ट*
• सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों से संबंधित 2016 के कानून का ईमानदारी से पालन करें। अदालत ने कहा कि इससे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव दिखता है।सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों संबंधी 2016 के कानून के प्रावधानों पर अमल के बारे में 12 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। 
• अदालत ने कहा कि नया कानून दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के संरक्षण के एक व्यापक फलक पर काम करता है। जस्टिस दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और एमएम शांतानागौडर की बेंच ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह महसूस करना चाहिए कि इस कानून के तहत उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है और अमल करने वाले प्राधिकारियों को तत्परता के साथ इसे प्रभावी बनाना चाहिए।
• अदालत ने कहा कि 2016 के कानून में हम यह पाते हैं कि दिव्यांग व्यक्तियों के बारे में नजरिए में व्यापक बदलाव है और इसमें राज्य सरकारों, स्थानीय प्राधिकारियों, शैक्षणिक संस्थाओं और कंपनियों की भूमिका निर्धारित है। कोर्ट इस मामले में अब 16 अगस्त को आगे सुनवाई करेगा। 
• अदालत ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तत्काल इस कानून के प्रावधानों पर अमल करने के लिए कदम उठाने चाहिए और इन पर अमल की रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट जस्टिस सुनन्दा भंडारे फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। 
• याचिका में दिव्यांग व्यक्तियों से संबंधित 1995 के कानून के प्रावधानों पर अमल के बारे में राज्यों को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याची की ओर से अदालत को बताया गया कि अधिसंख्य राज्य सरकारों ने अपनी रिपोर्ट पेश की है, लेकिन कुछ ने अभी तक अदालत के आदेश का पालन नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नए कानून में निशुल्क शिक्षा सहित दिव्यांगों को कई सुविधाएं प्रदान की गई हैं।

*4. तीनों सेनाओं के बीच सिनर्जी को नया ‘‘ज्वाइंट एक्शन प्लान’ पेश*
• देश की तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और ज्वांइट एक्शन प्लान की जरूरत के मद्देनजर 86 पेज का ‘‘संयुक्तता का नया सिद्धांत’ मंगलवार को भारतीय नौसेना प्रमुख और चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के चेयरमैन सुनील लांबा द्वारा पेश किया गया।

 

• सशस्त्र बलों के बीच बेहतर सिनर्जी के लिए जब इस सिद्धान्त को नौसेना प्रमुख ने पेश किया तो सेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख भी मौजूद थे। माना जा रहा है कि इससे तीनों सेनाओं की क्षमता तो बढ़ेगी ही, संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल होगा और धन की बचत भी हो सकेगी। हालांकि पहली बार संयुक्तता का सिद्धांत वर्ष 2006 में जारी किया गया था। लेकिन तब के बाद से हालात काफी बदल गए हैं, जिनके लिए संशोधन की जरूरत पड़ी।
•  इंटिग्रेटिड डिफेंस स्टाफ ने यह सिद्धांत तीनों सेनाओं के सहयोग से तैयार किया है। यह कहा गया है कि सैन्य ताकत के बीच तालमेल के लिए मूलभूत तत्व का काम करेगा। मोर्चा चाहे जमीनी हो या आसमानी, जल हो गया साइबर स्पेस, सभी क्षेत्रों में ऑपरेशंस की प्लानिंग और अमल के लिए यह फ्रेमवर्क का काम करेगा। इसे जिंदगी के दूसरे पहलुओं की तरह वक्त की मांग बताया गया है। ।
• इसके तहत राजनीतिक वर्ग की मंशा कैबिनेट की सिक्यॉरिटी कमिटी से होते हुए रक्षा मंत्री के जरिये चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी तक पहुंचेगी, जिसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख होंगे। इन निर्देशों को सैन्य उद्देश्यों में बदला जाएगा। हर सेना के मिशन और रोल को देखते हुए चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी इस तरह का इंटिग्रेटिड कोर्स ऑफ एक्शन तैयार करेगी, जिससे हर सेना की यूनीक पोजिशन कायम रहे। 
• कमिटी संयुक्त उद्देश्य और संसाधनों का बंटवारा तय करेगी। चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के तहत ऑपरेशंस पर अमल के लिए जॉइंट ऑपरेशंस कमिटी है।यहां यह बता देना समीचीन है कि देश में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और सरकार को सैन्य मसलों पर सिंगल पॉइंट सलाह के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति की मांग होती रही है। करगिल की जंग के बाद इसकी सख्त जरूरत महसूस की गई।
*5. बंगाल में बनेगा देश का पहला जैव बारकोड*
• अज्ञात जीवों और वनस्पतियों की पूरी जानकारी के लिए विश्व भर में बारकोड तैयार हो रहा है। देश में इसकी शुरुआत बंगाल से हो रही है। कल्याणी विश्वविद्यालय में इसके लिए बायो डायवर्सिटी लैब बनायी जा रही है। राज्य बायो डायवर्सिटी बोर्ड की पहल पर बन रही इस लैब में सुंदरवन अंचल में मौजूद उन जीवों और वनस्पतियों (उद्भिजों) के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी जिनके बारे में तथ्य उपलब्ध नहीं है।
• बारकोड एक ऐसा नंबर होता है जिसके जरिए संबंधित वस्तु के बारे में पूरी जानकारी समाहित की जाती है। शॉपिंग मॉल में सामानों पर लगे बारकोड इसी की निशानी है। अब मौजूदा अज्ञात जीवों के बारे में पूरी जानकारी के लिए ही राज्य सरकार ने यह पहल की है। 
• इस बारकोड को तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य बायो डायवर्सिटी बोर्ड के चेयरमैन अशोक कांति सन्याल, सीयू के प्रोफेसर अमलेश चौधरी, असम विवि की प्रोफेसर महुआ चौधरी, कल्याणी व्ििव के कुलपति डॉ. शंकर कुमार घोष को दी गई है। डॉ. घोष ने कहा कि सुंदरवन जैसा अभ्यारण्य दुनिया में नहीं है। ऐसे में यहां कई तरह के अज्ञात जीव व पेड़ पौधे मौजूद हैं। 
• बायोलॉजिकल वैज्ञानिक इनके बारे में अध्ययन करेंगे और फिर डीएनए आधारित बारकोड बनाया जाएगा। 2020 तक इससे संबंधित मोबाइल एप बनेगा जिसमें जीव की पूरी जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि इसकी सफलता के बाद कल्याणी विवि में ही बायो डायवर्सिटी हब भी बनाया जाएगा। ज्ञात हो, इंटरनेशनल बायो डायवर्सिटी बोर्ड ने 2010 में इसकी शुरुआत की थी। 
• मकसद 20 सालों के भीतर दुनियाभर में मौजूद अज्ञात जीवों व पेड़-पौधों के डीएनए का अध्ययन कर बार कोड बनाना है ताकि इनके बारे में पूरी जानकारी मिल सके। अब तक डेढ़ करोड़ जीवों का बारकोड बनाया जा चुका है।
*6. विलय से बैंकिंग प्रणाली  को फायदा*
• भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा है कि यदि कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को आपस में मिला कर ऐसे बैंकों की संख्या कम रखी जाए तो इससे भारतीय बैंकिंग पण्राली को लाभ होगा। वसूली में फंसे कजरे की समस्या का सामना करन में मदद मिलेगी।
• कोलंबिया विविद्यालय में कोटक परिवार के नाम से जुड़ी एक व्याख्यान माला में पटेल ने कहा, ‘‘कई लोगों का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि हमें इतने अधिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की जरूरत क्यों है। यदि इन बैंकों को विलय कर मजबूत बैंक बनाया जाए तो पण्राली बेहतर होगी।’
•  उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्तर की बैंकिंग सेवा देने के लिए कुछ सहकारी बैंक और सूक्ष्म वित्त संस्थान हैं। ऐसे में कुछ बैंकों का विलय किया जा सकता है। पटेल ने कहा कि भारत के केंद्रीय बैंक को बैंकिंग क्षेत्र के बड़े दबाव वाले बही खातों की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
• उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में एनपीए से निपटने के लिए कई उपाय किए गए हैं। इसमें बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता का वृहद समीक्षा भी शामिल है। पटेल ने कहा कि बैंकों के एकीकरण से ऐसी रीयल एस्टेट संपत्तियों को बेचा जा सकता है जहां शाखाएं बेकार हो चुकी हैं। 
• इसके अलावा कर्मचारियों की संख्या के प्रबंधन को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) की पेशकश की जा सकती है। युवा लोगों को जोड़ा जा सकता है जो आज की डिजिटल जरूरत को पूरा कर सकते हैं।
*7. सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हुआ नासा का सुपर प्रेशर बलून*
• नासा ने मंगलवार को फुटबॉल स्टेडियम के आकार के सुपर प्रेशर बलून को न्यूजीलैंड से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया है। यह गुब्बारा हमारे तारामंडल के परे से आने वाली कॉस्मिक किरणों के पृवी के वातावरण में प्रवेश करते ही उनका पता लगाने में मदद करेगा।
• यह मिशन 100 या उससे अधिक दिनों तक चलेगा। यह गुब्बारा दक्षिणी गोलार्ध में 33.5 किमी की ऊंचाई पर रहेगा। नासा के बलून प्रोग्राम ऑफिस के प्रमुख डेबी फेयरब्रदर ने कहा, ‘‘‘‘वर्ष 2015 और 2016 के हमारे न्यूजीलैंड मिशन के बाद हम बलून डिजाइन से जुड़े अहम सबक सीख गए हैं, इनसे इस साल की उड़ान के लिए प्रौद्योगिकी को उत्कृष्ट बनाया जा सका है।’
•  फेयरब्रदर ने कहा, ‘‘‘‘मुझे उस दल पर बहुत गर्व है, जो हमें इस बिंदु तक लेकर आया है। मुझे उम्मीद है कि यह तीसरा मौका 100 दिन की उड़ान को हकीकत में बदलने के लिहाज से अच्छा साबित होगा।’
8. ग्लोबल वॉर्मिग के खतरों को कुछ चुनौतियां*
• ग्लोबल वॉर्मिग के बढ़ते खतरों के बीच ऊर्जा के क्षेत्र के एक अंतरराष्ट्रीय समूह का कहना है कि सस्ती एवं भरोसमंद ऊर्जा की आपूत्तर्ि और आर्थिक विकास की रफ्तार को बरकरार रखते हुए धरती का तापमान दो डिग्री सेल्सियस से नीचे बनाए रखने का वैश्विक  लक्ष्य हासिल करना तकनीकी और आर्थिक रूप से व्यावहारिक है बशत्रे इस दिशा में तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी जाए। 
• एनर्जी ट्रांजिशन कमीशन की ‘‘बेहतर ऊर्जा, वृहत्तर समृद्धि ‘‘शीर्षक से विश्व के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न देशों की सरकारों, व्यवसायियों और निवेशकों को सर्वसुलभ ऊर्जा और आर्थिक रफ्तार सुनिश्चित करते हुए वर्ष 2040 तक वैश्विक  कार्बन उत्सर्जन पर रोक लगाने के मौके का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए उन्हें स्वच्छ विद्युतीकरण और कार्बन उत्सर्जन पर रोक लगाने पर तेजी से काम करना होगा। 
• स्वच्छ ऊर्जा पण्राली अपनाने से हवा की गुणवत्ता सुधरेगी जिससे लोगों की सेहत ठीक रहेगी। इसके साथ ही नई प्रौद्योगिकी के विकास और नए बिजनेस मॉडल से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। धरती का तापमान दो डिग्री सेल्सियस से नीचे र

करेंट अफेयर्स एक पंक्ति में: 26 अप्रैल 2017

• मेघालय फायरिंग की घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग के अध्यक्ष के रूप में इन्हें नियुक्त किया गया – न्यायमूर्ति बीडी अग्रवाल

• वह देश जिसके एक प्रांत में हाल ही में मुस्लिम बच्चों के नाम पर प्रतिबन्ध लगाने की घोषणा की गयी – चीन

• हिन्दू – मुस्लिम सौहार्द के लिए प्रसिद्ध मुगल कालीन शहज़ादा जिसकी याद में दिल्ली में सम्मेलन आयोजित किया गया – दारा शिकोह

• दिल्ली नगर निगम चुनावों में इस पार्टी को बहुमत प्राप्त हुआ – बीजेपी

• वह भारतीय महिला खिलाड़ी जिसने एशियन ग्रां प्री एथलेटिक्स मीट में शॉट पुट में स्वर्ण पदक जीता – मनप्रीत कौर

• टेस्ट क्रिकेट में दस हजार रन बनाने वाले पहले पाकिस्तानी खिलाडी का नाम है- यूनिस खान

• मनप्रीत कौर ने एशियाई ग्रांप्री एथलेटिक्स प्रतियोगिता में जो पदक जीता – स्वर्ण पदक

• जिस राज्य के मुख्यमंत्री ने आतंकवाद रोधी दस्ते के गठन को मंजूरी प्रदान की- पंजाब

• आतंकवाद से प्राचीन विरासत की रक्षा हेतु भारत सहित जितने देशों ने एक समूह बनाया- 10

• जिस राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की योजनाओं के अंतर्गत संशोधित गरीबी रेखा की आय सीमाओं को मंजूरी दी- हरियाणा

• केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत दूसरे चरण में जितने नए तीर्थस्थानों को सम्मिलित किया- 10

• उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने महापुरुषों की जयंती व बलिदान दिवस पर घोषित जितने सार्वजनिक अवकाश रद्द कर दिए- 15

• गोला फेंक प्रतियोगिता में भारतीय एथलीट मनप्रीत कौर ने किस देश में एशियाई ग्रां प्री एथलेटिक्स के पहले चरण में राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता- चीन

• ओडिसा के जिस पर्यावरण कार्यकर्ता को राज्यर के जनजातीय लोगों, उनकी संस्कृपति व भूमि की रक्षा हेतु एशिया क्षेत्र से गोल्ड्मैन पर्यावरण पुरस्काशर ग्रीन नोबेल के लिए चुना गया- प्रफुल्ल् सामंत्रा

• उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वाले भू माफियाओं पर रोक हेतु टास्क फोर्स का गठन किया, टास्क फोर्स का नाम है- एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स