दैनिक समसामयिकी 26 जनवरी 2019

देश मना रहा 70वां गणतंत्र दिवस

देश आज 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के ध्वजारोहण (झंडा फहराने) के बाद सुबह नौ बजे से गणतंत्र दिवस परेड शुरू होगी। डेढ़ घंटे तक चलने वाली परेड राजपथ से शुरू होकर लाल किले पर समाप्त होगी। इस बार परेड की अगुआई ‘नारी शक्ति’ करेगी। असम राइफल्स की मेजर खुशबू कंवर के नेतृत्व में महिला सैनिक परेड में हिस्सा लेंगी। सेना के मुताबिक, हर साल की तुलना में परेड में इस बार ज्यादा महिला सैनिक होंगी। इसके अलावा राजपथ पर एक महिला अफसर बाइक पर स्टंट भी करती दिखेगी।
इस बार परेड में हाथी पर सवार बहादुर बच्चों की झांकी नहीं दिखेगी। उनकी जगह प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित 26 बच्चे जीप पर सवार होकर गुजरेंगे। इन बच्चों को शैक्षणिक, खेल, बहादुरी और नवाचार जैसे 6 क्षेत्रों से चुना गया है।
भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।
गणतंत्र दिवस के मौके पर 1950 से ही विदेशी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राजाओं को बुलाने की परंपरा रही है। अब तक समारोह में अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और चीन से लेकर पड़ोसी राज्य भूटान, श्रीलंका के मुखिया इसका हिस्सा बन चुके हैं। इस बार भारत सरकार ने द. अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरिल रमपोसा को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, संघ के विचारक नानाजी देशमुख और गायक भूपेन हजारिका को भारत रत्न

केंद्र ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक नानाजी देशमुख और गायक भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने का ऐलान किया है। नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को मरणोपरांत यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलेगा। 20 वर्ष बाद दो से ज्यादा हस्तियों को इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए चुना गया है।
इससे पहले 1999 में समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण, सितार वादक पंडित रविशंकर, अर्थशास्त्री डॉ. अमर्त्य सेन और स्वतंत्रता सेनानी रहे गोपीनाथ बोरदोलोई को इस सम्मान के लिए चुना गया था। चार साल बाद भारत रत्न की घोषणा हुई है। इससे पहले 2015 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और स्वतंत्रता सेनानी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को यह सम्मान दिया गया था। इससे पहले 45 हस्तियों को भारत रत्न सम्मान दिया जा चुका है। अब यह संख्या 48 हो गई है।

लोक गायिका तीजन बाई, गौतम गंभीर और मनोज वाजपेयी समेत 112 को पद्म पुरस्कार

लोक गायिका तीजन बाई, क्रिकेटर गौतम गंभीर और अभिनेता मनोज वाजपेयी समेत विभिन्न क्षेत्रों के 112 लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने तीजन बाई को पद्म विभूषण, जबकि गंभीर और मनोज वाजपेयी को पद्मश्री के लिए चुना है। तीजन बाई के अलावा इस्माइल उमर गुलेह, अनिल कुमार मणिभाई नाइक और बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे को पद्म विभूषण के लिए चुना गया है। वहीं, सुखदेव सिंह ढींढसा समेत 14 लोगों को पद्म भूषण और पहलवान बजरंग पुनिया और फुटबॉलर सुनील छेत्री समेत 94 लोगों को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। इस बार पद्म पुरस्कार समिति को 49 हजार 992 लोगों के नाम भेजे गए थे। 2010 की तुलना में यह संख्या 32 गुना ज्यादा है। तब सिर्फ 1313 नॉमिनेशन प्राप्त हुए थे।

20 में पांच मैच जीतने पर मोनाको ने हेनरी को कोच पद से हटाया

फ्रांस के पूर्व खिलाड़ी थिएरे हेनरी को मोनाको फुटबॉल क्लब ने कोच पद से हटा दिया है। हेनरी तीन माह तक टीम के कोच रहे। इस दौरान टीम ने 20 मैच खेले, जिसमें उसे केवल पांच में ही जीत मिली। हेनरी लियोनाडरे जार्डिम की जगह कोच बनाए गए थे। मोनाको फिर से जार्डिम को कोच बना सकता है। फिलहाल हेनरी के सहायक रहे फ्रैंक पास्सी को टीम का कार्यभार सौंपा गया है।

ऑस्ट्रेलियन ओपन : स्टोसुर 14 साल बाद चैम्पियन बनीं

ऑस्ट्रेलिया की समांथा स्टोसुर और चीन की झांग शुआई की जोड़ी ने ऑस्ट्रेलियन ओपन में वुमन्स डबल्स का खिताब जीत लिया। दोनों ने हंगरी की टिमिया बाबोस और फ्रांस की क्रिस्टिना म्लाडेनोविच की जोड़ी को 6-3, 6-4 से हराया। यह मुकाबला एक घंटे, 36 मिनट तक चला। स्टोसुर ने इस टूर्नामेंट में 14 साल बाद खिताब जीता। पिछली बार 2005 में उन्होंने अपने ही देश के स्कॉट ड्रैपर के साथ मिलकर मिक्स्ड डबल्स का खिताब जीता था।

ब्राजील / बांध ढहने से 200 से ज्यादा लोग लापता

दक्षिण-पूर्व ब्राजील में शुक्रवार को बांध ढहने के कारण इससे आई बाढ़ की चपेट में आकर कई लोगों के मारे जाने की आशंका है। कम से कम 200 लोगों के लापता होने की बात कही जा रही है। यह इलाका होरिजोंटे शहर से सटा है। बांध ब्राजील की सबसे बड़ी खनन कंपनी वेल का था, जिसने इसके ढहने की पुष्टि की है। कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि उसकी प्राथमिकता कर्मचारियों और बांध के आसपास रहने वालों को बचाना है।

हिंदी की मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती नहीं रहीं

हिंदी की मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती का शुक्रवार को नई दिल्ली में 93 साल की उम्र में निधन हाे गया। उनका जन्म 18 फरवरी 1925 को गुजरात-पंजाब प्रांत में हुआ था। यह क्षेत्र अब पाकिस्तान में है। बंटवारे के वक्त उनका परिवार दिल्ली आकर बस गया था। उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली और शिमला में हुई। सोबती को 1980 में ‘जिंदगीनामा’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। 1996 में उन्हें साहित्य अकादमी का फैलो बनाया गया जो अकादमी का सर्वोच्च सम्मान है। 2017 में इन्हें भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान “ज्ञानपीठ पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। 2015 में असहिष्णुता के मुद्दे पर साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया था।

जीन में बदलाव कर वैज्ञानिकों ने पांच क्लोन बंदर बनाए

चीन के वैज्ञानिकों ने दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने वाले बंदर के जीन में बदलाव कर पांच क्लोन तैयार किए हैं। उन्होंने यह प्रयोग एक चिकित्सीय शोध के दौरान किया। वैज्ञानिकों का दावा है कि अफ्रीकी बंदर और क्लोन बंदर का जीन एक समान है। इन बंदरों पर शोध कर मनुष्यों में कैंसर, नींद, डिप्रेशन और भूलने की बीमारी जैसे अन्य रोगों के बारे में पता लगाया जा सकेगा।