दैनिक समसामयिकी 27 जुलाई 2018

दैनिक समसामयिकी

27 July 2018(Friday)

1.ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का दसवां सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका में शुरू
• ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का दसवां सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका में शुरू हो गया है। इस सम्मेलन में शिरकत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कारोबार और नियम आधारित विश्व व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
• ब्रिक्स देशों ने अपने उभरते हुए बाजारों से अफ्रीका में औद्योगिक क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर साङोदारी के लिए भी प्रतिबद्धता जताई। 1ब्रिक्स नेताओं के सत्र में गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बात रखी।
• उम्मीद की जा रही है कि ब्रिक्स सम्मेलन के दसवें समारोह में समूह के नेता गण वैश्विक मुद्दों, अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा, ग्लोबल गर्वनेंस और व्यापार के मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
• मेजबान दक्षिण अफ्रीका के व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए अधिकार का पूरा लाभ उठाना चाहेगा।
• इस सम्मेलन में मोदी के चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विश्व के अन्य नेताओं से भी मुलाकात करने की उम्मीद है।
• उल्लेखनीय है कि 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से पहले ब्रिक्स को ब्रिक कहा जाता था। दक्षिण अफ्रीका ही इस बार के ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह उसकी मेजबानी का दूसरा मौका है।

2. भारत के वटवाणी और वांगचुक को मैगसेसे
• दो भारतीय नागरिकों भरत वटवाणी और सोनम वांगचुक का नाम इस वर्ष के रेमन मैगसेसे पुरस्कार के विजेताओं में शामिल है। वटवाणी मानसिक रोग चिकित्सक हैं जो कि मानसिक रूप से बीमार बेसहारा व्यक्तियों के लिए काम करते हैं। वहीं वांगचुक ने आर्थिक प्रगति के लिए विज्ञान और संस्कृति का इस्तेमाल करने की पहल कर लद्दाखी युवकों के जीवन में सुधार किया।
• भरत वटवाणी और सोनम वांगचुक उन छह लोगों में शामिल हैं जिन्हें आज इस पुरस्कार के विजेता घोषित किया गया जिसे एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है।
• रेमन मैगसेसे अवार्ड फाउंडेशन ने कहा, वटवाणी की यह पहचान भारत के मानसिक रूप से पीड़ित निराश्रितों को सहयोग एवं उपचार मुहैया कराने में उनके साहस और करुणा तथा समाज द्वारा नजरंदाज किए गए व्यक्तियों की गरिमा को बहाल करने के कार्य के प्रति उनके दृढ़ और उदार समर्पण के लिए की गई है।वटवाणी मुंबई में रहते हैं और उनकी पत्नी ने मानसिक रूप से पीड़ित बेसहारा लोगों को इलाज के लिए उनके निजी क्लीनिक लाना शुरू किया।
• इससे दोनों ने 1988 में श्रद्धा रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन की स्थापना की। इसका उद्देश्य सड़क पर रहने वाले मानसिक रूप से बीमार लोगों को मुफ्त आश्रय, भोजन और मनोरोग उपचार मुहैया कराना तथा उन्हें उनके परिवारों से मिलाना है।
• वांगचुक (51) को यह पहचान उत्तर भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में ‘‘शिक्षा की विशिष्ट व्यवस्थित, सहयोगी और समुदाय संचालित सुधार पण्राली के लिए की गई है जिससे लद्दाखी युवाओं के जीवन के अवसरों में सुधार हुआ।
• इसके साथ उनकी यह पहचान आर्थिक प्रगति के वास्ते विज्ञान एवं संस्कृति का उपयोग करने को लेकर रचनात्मक रूप से स्थानीय समाज के सभी क्षेत्रों को सकारात्मक रूप से लगाने के उनके कार्य के लिए की गयी है। उनके इस कार्य से विश्व में अल्पसंख्यक लोगों के लिए एक उदाहरण बना।
• वांगचुक श्रीनगर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में 19 वर्षीय इंजीनियरिंग के छात्र थे जब उन्होंने अपनी शिक्षा के वित्तपोषण के लिए ट्यूशन शुरू की और उन्होंने बिना तैयारी के छात्रों को मेट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने में मदद की।1988 में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने के बाद वांगचुक ने ‘‘स्टूडेंट्स एजुकेशन एंड कल्चरल मूवमेंट आफ लद्दाख’ की स्थापना की और लद्दाखी छात्रों को कोचिंग देना शुरू किया, जिसमें से 95 प्रतिशत सरकारी परीक्षाओं में असफल हो जाते थे।
• 1994 में वांगचुक के नेतृत्व में ‘‘आपरेशन न्यू होप’ शुरू किया गया जिसका उद्देश्य साझेदारी संचालित शैक्षिक सुधार कार्यक्रम को विस्तारित करना और उसे समेकित करना था। इसके साथ ही इस पुरस्कार के अन्य विजेताओं में युक चांग (कंबोडिया), मारिया डी लोर्डस मार्टिंस क्रूज (पूर्वी तिमोर), होर्वड डी (फिलिपिन) और वी टी होआंग येन रोम (वियतनाम) शामिल हैं।
• रेमन मैगसेसे अवार्ड फाउंडेशन अध्यक्ष कारमेनसिता एबेला ने कहा कि विजेता स्पष्ट रूप से एशिया की उम्मीद के नायक हैं जिन्होंने अपने प्रयासों से समाज को आगे बढाया।
• उन्होंने कहा, वंचित और हाशिये पर रहने वाले लोगों के साथ वास्तव में एकजुटता दिखाते हुए इनमें से प्रत्येक ने वास्तविक और जटिल मुद्दों का साहसी, रचनात्मकता और व्यावहारिक कदमों से समाधान किया है जिससे अन्य वैसा ही करने में लगे। रेमन मैगसेसे पुरस्कार एशिया का सबसे बड़ा पुरस्कार है।

3. इमरान को मिली पाक की ’कप्तानी‘‘ : भारत से संबंध सुधारना चाहता है पाकिस्तान
• पाकिस्तान के आम चुनावों में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। संसदीय चुनावों के ताजा अनाधिकारिक नतीजों और रूझानों के मुताबिक पीटीआई नेशनल असेंबली की 104 सीटें जीत चुकी है जबकि 14 सीटों पर आगे चल रही है। हालांकि, प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक पार्टियों ने चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए हैं।
• जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने 58 सीटों पर जीत हासिल की है और 4 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की अगुवाई वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने 37 सीटें जीत ली हैं और 6 सीटों पर आगे चल रही है।
• किसी एक पार्टी को अपने दम पर सरकार बनाने के लिए सीधे तौर पर निर्वाचित सीटों में से कम से कम 137 सीटों की जरूरत होगी। जमात-इस्लामी, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल, जमीयत उलेमा-ए-पाकिस्तान और तहरीक-ए-जफरिया जैसी परंपरागत धार्मिक पार्टियों का गठबंधन मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट आठ-आठ सीटों पर आगे चल रहे हैं।
• बुधवार को मतदान के बाद शुरू हुई वोटों की गिनती में परिणाम अनुकूल देखकर पीटीआई समर्थकों ने राजनीतिक तौर पर अहम पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में झंडे लहराकर और पार्टी के नारे लगाकर जश्न मनाया। पाकिस्तान चुनाव आयोग ने पहले नतीजे की आधिकारिक घोषणा सुबह चार बजे की। अगले कुछ घंटों में अंतिम परिणाम आने की संभावना है। हालांकि, शुरुआती परिणामों के मुताबिक पीटीआई नेशनल असेंबली में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर रही है।
• पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 342 सदस्य होते हैं जिनमें से 272 को आम चुनावों में सीधे तौर पर चुना जाता है जबकि शेष 60 सीटें महिलाओं और 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं। आम चुनावों में पांच फीसदी से ज्यादा वोट पाने वाली पार्टियां इन आरक्षित सीटों पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व के हिसाब से अपने प्रतिनिधि भेज सकती हैं।
• कुल 172 सीटें पाने वाली पार्टी सरकार बना सकती है। दो प्रमुख पार्टियों (पीएमएल-एन और पीपीपी) ने मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कानूनी प्रावधान होने के बाद भी उनके मतदान एजेंटों को गिने हुए वोट सत्यापित करने की इजाजत नहीं दी गई।
• चार प्रांतों (पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वा) में विधानसभा चुनाव भी कराए गए थे। प्रांतीय विधानसभाओं के चुनावों के रुझान के मुताबिक, पीटीआई पंजाब की 120 सीटों पर आगे चल रही है जबकि पीएमएल-एन 119 सीटों पर आगे चल रही है।
• पंजाब विधानसभा में कुल 299 सीटें हैं। सिंध प्रांत में पीपीपी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की दिशा में बढ़ रही है। सिंध विधानसभा की कुल 131 सीटों में से 113 सीटों के लिए उपलब्ध ताजा रूझानों के मुताबिक पीपीपी 72 सीटों पर आगे चल रही है।

4. वोडाफोन-आइडिया विलय को अंतिम मंजूरी
• सरकार ने वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के विलय को अंतिम मंजूरी दे दी है। इसी के साथ ही इन दोनों के विलय से देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बनाने का रास्ता करीब – करीब साफ हो गया है।
• नई कंपनी की बाजार में हिस्सेदारी 35 प्रतिशत और इसके ग्राहकों की संख्या लगभग 43 करोड़ होगी। इस मामले से जुड़े दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि विलय को गुरुवार को अंतिम मंजूरी दे दी गयी है और औपचारिकताओं का अंतिम चरण पूरा करने के लिए अब कंपनियों को मंजूरी के लिए कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) के सामने विवरण प्रस्तुत करना होगा।
• दोनों कंपनियों द्वारा एकबारगी स्पेक्ट्रम शुल्क और अन्य देनदारियों के एवज में भुगतान करने के कुछ दिन बाद यह कदम उठाया गया है।उल्लेखनीय है कि आइडिया सेल्युलर और वोडाफोन इंडिया ने अपने मोबाइल कारोबार के विलय के लिए विरोध दर्ज करते हुये दूरसंचार विभाग को 7,248.78 करोड़ रूपये का भुगतान किया। इससे पहले दूरसंचार विभाग ने 9 जुलाई को दोनों कंपनियों को सशर्त विलय की अनुमति दी थी।

5. विनिवेश से Rs5900 करोड़ जुटने की उम्मीद
• सरकार जमीन – जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियां हुडको तथा एनबीसीसी में 10-10 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री पेशकश के जरिये बेचने की योजना बना रही है। इसके अलावा तीन प्रतिशत हिस्सेदारी एनटीपीसी में बेचने की योजना है। इससे सरकारी खजाने को कुल मिलाकर 5900 करोड़ रूपये मिल सकते हैं।
• एक सूत्र ने बताया कि वित्त मंत्रालय हुडको और एनबीसीसी में हिस्सेदारी बिक्री के प्रबंधन के लिए मर्चेन्ट बैंकरों की नियुक्ति को लेकर अनुरोध प्रस्ताव जल्द लाएगा। उसने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने एनबीसीसी और हुडको में बिक्री पेशकश के जरिये 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बिक्री को मंजूरी दी है। इसे एक बार में बेचा जाएगा या नहीं, इसका निर्णय निवेशकों की प्रतिक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
• ’मौजूदा बाजार भाव पर हुडको और एनबीसीसी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री से सरकारी खजाने को क्रमश: 1,000 करोड़ रुपये और 1,200 करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद है। एनटीपीसी में बिक्री पेशकश के जरिये तीन प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने से 3,700 करोड़ रपए प्राप्त होने की संभावना है।
• मंत्रिमंडल पहले ही बिजली कंपनी एनटीपीसी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री को मंजूरी दे चुका है। सूत्र ने कहा कि हुडको और एनबीसीसी में हिस्सेदारी बिक्री अक्टूबर – दिसम्बर तिमाही में हो सकती है।
• हुडको में सरकार की हिस्सेदारी 89.81 प्रतिशत तथा एनबीसीसी में 73.69 प्रतिशत है। वहीं एनटीपीसी में सरकार की हिस्सेदारी 61.71 प्रतिशत है। चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिये 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है और अब तक सरकार सिर्फ 9,000 करोड़ रुपये की हासिल कर पाई है।

6. केंद्र ने बिना कारण बताए दो नाम कोलेजियम को लौटाए
• हाई कोर्ट न्यायाधीशों के दो पदों के लिए सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश को केंद्र सरकार ने लौटा दिया है। केंद्र ने दोनों ही पदों के लिए सुझाए गए नामों पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है। नाम वापसी के लिए केंद्र ने अभी कोई कारण नहीं बताया है।
• कोलेजियम सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाला पैनल है जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के लिए न्यायाधीशों के नाम की सिफारिश करता है। सामान्य स्थितियों में सरकार सिफारिश वाले नामों को स्वीकृत करती है।
• सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सन 2016 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के लिए हरनरेश सिंह गिल और कलकत्ता हाई कोर्ट के लिए मुहम्मद निजामळ्द्दीन को न्यायाधीश बनाने की संस्तुति की थी। दोनों ही अनुभवी अधिवक्ता हैं। दोनों के नाम सरकार ने वापस करते हुए कोई कारण नहीं बताया है।
• हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने दो और वकीलों- मुहम्मद मंसूर और बशरत अली खान को न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी। इनमें से एक के पिता शीर्ष अदालत में न्यायाधीश रह चुके हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायाधीश बनाने के लिए उक्त अधिवक्ता का नाम केंद्र ने दूसरी बार लौटाया। सरकार ने कहा कि नामित अधिवक्ता के खिलाफ कई शिकायतें हैं।
• इसी प्रकार से सरकार ने अधिवक्ता नजीर अहमद बेग के नाम को भी वापस भेजा। उन्हें जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट में न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई थी, जबकि इसी हाई कोर्ट में वसीम सदीक नारगल, सिंधु शर्मा और राशिद अली डार की नियुक्ति के लिए कानून मंत्रलय ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनके नाम की सिफारिश भी कोलेजियम ने की थी।
• इससे पहले वरिष्ठता और क्षेत्रीय असंतुलन का हवाला देते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएम जोसेफ का नाम केंद्र सरकार ने वापस कर दिया था। कोलेजियम ने जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की थी।

7. पश्चिम बंगाल का नया नाम हो सकता है बांग्ला
• पश्चिम बंगाल का नया नाम ‘बांग्ला’ होगा। ममता सरकार ने राज्य का नाम बदलने के लिए गुरुवार को विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। राज्य के सभी दलों ने विधानसभा में इस प्रस्ताव पर सहमति जताई।
• अब इस प्रस्ताव को केंद्र के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रस्ताव पारित होने के दौरान कहा, हम तीन अलग-अलग भाषाओं में राज्य का तीन नाम करना चाहते थे, लेकिन यह केंद्र को मंजूर नहीं था। इसीलिए एक ही नाम बांग्ला रखा गया है। ज्ञात हो, दो साल पहले भी ममता सरकार ने नाम बदलने का प्रयास किया था, लेकिन उस पर बात आगे नहीं बढ़ पाई थी .
• 2011 में ममता बनर्जी ने राज्य का नाम बदलने के लिए प्रस्ताव पारित कराया था, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद सरकार ने अलग-अलग भाषाओं में राज्य के तीन नाम सुझाते हुए विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया था।
• 2016 में पारित प्रस्ताव में पश्चिम बंगाल का नाम बांग्ला भाषा में बांग्ला, हिंदी में बंगाल और अंग्रेजी में बेंगाल रखा गया था, लेकिन नामों में एकरूपता नहीं होने के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रलय ने प्रस्ताव को नामंजूर करते हुए एक ही नाम रखने का सुझाव दिया। उसी अनुसार गुरुवार को बांग्ला नाम देने के लिए प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
• 1947 में आजादी और देश के विभाजन के बाद बंगाल प्रांत का भी विभाजन हो गया। जो हिस्सा भारत के साथ रहा, उसे पश्चिम बंगाल कहा गया और जो पाकिस्तान के पास गया, उसे पूर्वी पाकिस्तान कहा गया जो अब बांग्लादेश कहलाता है।

8. कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन को लेकर नया अनुमान
• भारत का कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन 2030 तक 3.8-3.9 गीगाटन बढ़ जाएगा। यह अनुमान एक अध्ययन में सामने आया है। पहले कहा गया था कि 2030 तक भारत का कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन 3.8-4.9 गीगाटन बढ़ेगा।
• नया अनुमान पेरिस जलवायु सम्मेलन में जताए गए संकल्प के अनुरूप है। सेंटर फॉर पालिसी रिसर्च के अध्ययन के अनुसार भले ही 2030 तक कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन 3.8-3.9 गीगाटन के स्तर तक पहुंच जाए, लेकिन तब भी भारत में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन की अनुमानित दर आज के वैश्विक औसत से कम ही रहेगी।
• अध्ययन में कहा गया कि देश तेजी से कोयले से वैकल्पिक ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। अध्ययन में शामिल अंकित भारद्वाज का कहना है कि भारत अनुमान से कहीं अधिक तेज रफ्तार से कोयले से वैकल्पिक ऊर्जा की ओर बढ़ सकता है। इसके साथ ही ऊर्जा की मांग में कमी भी लाई जा सकती है। ये दोनों पहलू कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन घटाने में मददगार होंगे।
• भारत जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के मामले में दुनिया के सबसे अधिक महत्वपूर्ण देशों में शामिल है। इसका कारण यह है कि वह अपने सभी अंतरराष्ट्रीय संकल्पों को पूरी गंभीरता से पूरा कर रहा है।