दैनिक समसामयिकी 28 जुलाई 2018

दैनिक समसामयिकी 28 July 2018(Saturday)

1.मोदी-शी द्विपक्षीय संबंधों में गति कायम रखने को राजी
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिन¨फग इस बात पर राजी हुए हैं कि उनकी हालिया बैठकों से दोनों देशों के संबंधों में बनी गति को कायम रखने के लिए चीन के रक्षा मंत्री अगले महीने भारत का दौरा करेंगे। मोदी यहां ब्रिक्स सम्मेलन में शरीक होने आए हैं।
• उन्होंने शी से पिछले करीब तीन महीने में तीसरी बार बृडस्पतिवार शाम मुलाकात की। इससे पहले अप्रैल के अंत में चीनी शहर वुआन में उनकी दो दिवसीय अनौपचारिक बैठक हुई थी। मोदी ने अपनी टिप्पणी में शी से कहा, इस गति को कायम रखना जरूरी है और इसके लिए हमें अपने स्तर पर नियमित रूप से अपने संबंध की समीक्षा करनी चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर उपयुक्त निर्देश देना चाहिए।
• उन्होंने चीनी नेता से कहा कि उनकी हालिया बैठकों ने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई मजबूती दी है और सहयोग के नए अवसर भी मुहैया किए हैं। चीनी सरकारी समाचार एजेंसी की खबर के मुताबिक राष्ट्रपति शी ने कहा कि चीन वुहान में हुई उनकी अनौपचारिक बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढाने के लिए काम करने को तैयार है।
• बैठक के बारे में संवाददाताओं से विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि दोनों नेताओं ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच संचार को बढ़ाने के लिए अपनी-अपनी सेनाओं को आवश्यक निर्देश देने और सीमावर्ती इलाकों में शांति कायम रखने के प्रति खुद के तैयार होने की बात दोहराई है।

2. डिजिटल तकनीकी का लाभ उठाएं विकासशील देश : मोदी
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डिजिटल तकनीकी में क्रांति से चौतरफा विकास के नए अवसर खुले हैं और विकासशील देशों को इस तकनीकी का समुचित उपयोग करके इसका भरपूर फायदा उठाना चाहिए।
• मोदी ने शुक्रवार को यहां बिक्स-अफ्रीकी आउटरीच और ब्रिक्स-पल्स आउटरीच सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, डिजिटल क्षेत्र में तकनीकी क्रांति ने नए अवसर प्रदान किए हैं। हम औद्योगिक क्रांति के पहले चरण के अवसर से चूक गए हैं लेकिन हम अब अवसर के ऐतिहासिक मोड़ पर खड़े हैं।
• मोदी ने कहा, अफ्रीका के साथ भारत के संबध ऐतिहासिक और गहरे हैं। अफ्रीका में स्वतंत्रता, विकास और शांति के लिए भारत के ऐतिहासिक प्रयासों के विस्तार को मेरी सरकार ने सर्वाधिक महत्व दिया है। पिछले चार सालों में हमारे आर्थिक संबंध और विकास सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। आज 40 से अधिक अफ्रीकी देशों में 11 अरब डॉलर से अधिक की 180 लाइन्स ऑफ क्रेडिट जारी हैं।
• बुधवार को युगांडा की संसद को संबोधित करते हुए मैंने भारत और अफ्रीका की साझेदारी के 10 सिद्धांतों की विस्तार से र्चचा की। ये सिद्धांत अफ्रीका की आवश्यकतानुसार विकास के लिए सहयोग, शांति और दोनों देशों के बीच सैकड़ों साल पुराने रिश्तों को और मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देश हैं।इस वर्ष सम्मेलन का विषय ‘‘चौथी औद्योगिक क्रांति में विकासशील देशों का समावेशी विकास और साझा समृद्धि’ है।
• मोदी ने कहा, मैं अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र की महत्वपूर्ण पहल के लिए सभी अफ्रीकी देशों को हार्दिक बधाई देता हूं। अफ्रीका में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के लिए हो रहे प्रयासों का भी मैं स्वागत करता हूं। मुक्त व्यापार एवं वाणिज्य ने पिछले तीन दशकों में कई लाख लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है।
• वैश्वीकरण और विकास के लाभ को लोगों तक पहुँचाना इस प्रक्रिया का प्रमुख हिस्सा था। उन्होंने कहा कि 2008 के आर्थिक संकट के बाद से वैश्वीकरण के इस मूलभूत पहलू पर संरक्षणवाद के बादल मंडरा रहे हैं। इस प्रवृति का और विकास दर में मंदी का सबसे गहरा प्रभाव भारत जैसे उन देशों पर पड़ा है जो औपनिवेशिक काल में औद्योगिक प्रगति के अवसरों का लाभ नहीं उठा पाए।
• उन्होंने कहा, आज हम एक बार फिर ऐतिहासिक मोड़ पर हैं। डिजिटल क्रांति से हमारे लिए नई संभावनाएं उत्पन्न हो रही हैं। मोदी ने कहा, साझेदार देशों के विकास में भारत पूरा सहयोग करता रहा है।
• साउथ-साउथ कोआपरेशन के अंतर्गत अपने विकास अनुभवों को साझा करके अन्य विकासशील देशों में तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और क्षमता विकास में हर संभव मदद हमारी विदेश नीति का अहम हिस्सा है।
• भारत की अपनी विकास यात्रा में साउथ-साउथ कोआपरेशन एक प्रमुख आधार रहा है। अपने विकास अनुभव को विकासशील देशों के साथ साझा करना भारत की प्राथमिकता रही है और भविष्य में भी रहेगी।

3. डेटा सुरक्षा कानून में यूजर के नुकसान की जिम्मेदारी तय हो: जस्टिस श्रीकृष्ण समिति
• जस्टिस बी.एन. श्रीकृष्ण समिति ने शुक्रवार को डेटा सुरक्षा पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दीं। इसमें व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, सहमति वापस लेने का अधिकार, नियमों के उल्लंघन पर पेनाल्टी, आपराधिक मुकदमा, डेटा अथॉरिटी का गठन जैसे प्रस्ताव हैं।
• गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी विदेशी कंपनियों को भी इस रिपोर्ट का इंतजार था। भविष्य में भारत में उनका बिजनेस इसी पर निर्भर करेगा।
• सरकार जन-कल्याण, कानून-व्यवस्था, इमरजेंसी, रोजगार आदि के लिए बिना यूजर की सहमति के उसका डेटा ले सकती है।
• डेटा की सुरक्षा के लिए आधार एक्ट में संशोधन किया जाए
• यूजर की सहमति के बिना व्यक्तिगत डेटा की प्रोसेसिंग ना हो। यूजर को नुकसान होने पर जिम्मेदारी भी तय हो।
• डेटा देश से बाहर ले जाने के लिए कंपनी यूजर की सहमति ले।
• डेटा सुरक्षा के लिए आधार एक्ट में संशोधन हो। लेकिन यह पिछली तारीख से लागू ना हो।
• डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी का गठन हो। इसके आदेशों पर सुनवाई के लिए सरकार अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाए या मौजूदा ट्रिब्यूनल को अधिकार दे।
• नियम उल्लंघन पर पेनाल्टी का प्रावधान हो। इसकी ऊपरी सीमा तय होनी चाहिए।

4. आर्थिक संकट से जूझ रहा संयुक्त राष्ट्र देशों से समय पर पैसा देने की अपील
• संयुक्त राष्ट्र में धन की कमी के खतरे की ओर ध्यान खींचते हुए महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने सदस्य देशों से अनिवार्य अनुदान की राशि पूरी और समय पर अदा करने का आग्रह किया है।
• संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को लिखे पत्र में गुतेरस ने कहा कि उन्होंने संगठन के सामने आ रहे कठिन आर्थिक हालात के संबंध में सदस्य देशों को आगाह किया है। 1उन्होंने पत्र में लिखा, ‘नियमित बजट में सदस्य देशों की ओर से अनुदान राशि अदा करने में देरी के चलते नगदी की कमी का सामना जिस तरह हम कर रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं किया।’
• उन्होंने कहा है कि किसी कैलेंडर वर्ष में हमारा धन इतनी जल्दी इतना कम कभी नहीं हुआ।126 जुलाई तक भारत समेत 112 सदस्य देशों ने अपने नियमित बजट बकाये का पूरा भुगतान कर दिया है।
• भारत ने इस साल 29 जनवरी को 1.79 करोड़ डॉलर (लगभग 123 करोड़ रुपये) का भुगतान किया था। इस साल जून के आखिर में सदस्य देशों द्वारा 2008 के आकलन के लिए अदा की गई राशि करीब 1.49 अरब डॉलर (लगभग 10,238 करोड़ रुपये) रही। पिछले साल इसी अवधि में नियमित बजट में जमा राशि 1.70 अरब डॉलर (लगभग 11,680 करोड़ रुपये) से कुछ अधिक थी।
• कुल देशों को अभी अपने नियमित बजट बकाये का भुगतान करना है। इनमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश, ब्राजील, मिस्न, इजरायल, मालदीव, पाकिस्तान, सऊदी अरब, सेशेल्स, सूडान, सीरिया, अमेरिका और जिम्बाब्वे शामिल हैं।

5. बिहार में उच्च शिक्षा के रुझान में आई कमी, यूपी की बढ़त जारी
• उच्च शिक्षा को लेकर रुझान बढ़ाने में जुटी सरकार को बिहार जैसे राज्यों ने झटका दिया है। नामांकन दर (जीईआर) पिछले साल के मुकाबले करीब डेढ़ फीसद कम हुई है। वर्ष 2016-17 में जहां यह औसत 14.4 फीसद था, वहीं 2017-18 में यह 13 फीसद हो गया है। हालांकि उत्तर प्रदेश ने इस मामले में अपनी बढ़त को जारी रखी है।
• पिछले साल उत्तर प्रदेश का उच्च शिक्षा में नामांकन जहां 24.9 फीसद था, वही 2017-18 में यह 25.9 हो गया है। यह राष्ट्रीय औसत के बिल्कुल करीब है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में देश में उच्च शिक्षा का जीईआर 26 फीसद है।
• जीईआर का निर्धारण राज्य में 18 से 23 आयु वर्ग की कुल आबादी के आधार पर तय होता है।
• मानव संसाधन विकास मंत्रलय की ओर से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च शिक्षा को लेकर यह रुझान जिन राज्यों में घटा है, उनमें हरियाणा, गोवा, मणिपुर और गुजरात जैसे राज्य शामिल हैं। यहां पिछले साल के मुकाबले नामांकन का औसत गिरा है। वहीं जिन राज्यों ने बढ़त जारी रखी है, उनमें उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य शामिल हैं।
• अग्रणी राज्यों में तमिलनाडु है, जहां का औसत 48.7 फीसद है, वहीं दिल्ली में यह औसत 46.3 फीसद है। छात्र-शिक्षक औसत के मामले में देश की स्थिति काफी चिंताजनक है। इसका राष्ट्रीय स्तर 25 फीसद है, यानि 25 छात्रों पर एक शिक्षक है।
• यह स्थिति बिहार में और ज्यादा खराब है, जहां 67 छात्रों पर एक शिक्षक है। पिछले साल के मुकाबले बिहार ने इस मामले में अपनी स्थिति मजबूत की है। पिछले साल बिहार का यह औसत 70 था।
• उत्तर प्रदेश में छात्र-शिक्षक का औसत 60 फीसद का है। यानी 60 छात्रों पर एक शिक्षक है। दूसरे देशों में यह स्थिति काफी अच्छी है, जहां प्रत्येक 17 से 20 छात्रों पर एक शिक्षक का औसत है।

6. खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में एफडीआई बढ़ा
• खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में वित्त वर्ष 2017-18 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 24 फीसद बढ़कर 90.49 करोड़ डालर हो गया। वर्ष 2016-17 में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कुल 72.72 करोड़ डालर का एफडीआई आया था।
• आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015-16 और वर्ष 2014-15 के दौरान एफडीआई के जरिए क्षेत्र में क्रमश: 50.58 करोड़ डालर और 51.58 करोड़ डालर का निवेश हुआ। सरकार ने पिछले वर्ष जुलाई में अमेजन को भारत में खाद्य उत्पादों की खुदरा बिक्री में 50 करोड़ डालर निवेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
• वर्तमान में सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 100 फीसद एफीआई की अनुमति दी हुई है। खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस वर्ष फरवरी में कहा था कि क्षेत्र में एफडीआई निवेश वर्ष 2017-18 में एक अरब डालर के स्तर को छू सकता है।

7. दूध उत्पादन में दर्ज हुआ 6.6 फीसद का इजाफा
• देश का दूध उत्पादन पिछले वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 6.6 फीसद बढ़कर 17.63 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
• केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कृष्णा राज ने लोकसभा में सदस्यों को लिखित जवाब में कहा , ‘‘देश में दूध उत्पादन वर्ष 2016-17 के दौरान 16.54 करोड़ टन और वर्ष 2017-18 के दौरान 17.63 करोड़ टन (अस्थायी रूप से) रहा।’ देश के लिए यह गौरव की बात है।
• उन्होंने बताया कि विजन 2022 दस्तावेज के मुताबिक वर्ष 2021-22 तक दूध उत्पादन 25.45 करोड़ टन रहने का अनुमान है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है।

8. अस्पतालों में एक लाख आयुष्मान मित्र होंगे तैनात, Rs.15 हजार माह होगा वेतन
• केंद्र सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत के तहत पांच साल के दौरान राेजगार के करीब 10 लाख अवसर पैदा होंगे। यह अनुमान स्वास्थ्य मंत्रालय का है। सरकारी और निजी अस्पतालों में सीधे तौर पर करीब एक लाख आयुष्मान मित्र तैनात किए जाएंगे।
• उन्हें 15 हजार रुपए महीना वेतन मिलेगा। एक लाख आयुष्मान मित्रों की भर्ती के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के बीच समझौता हुआ है। 20 हजार आयुष्मान मित्र इस वित्त वर्ष में तैनात कर दिए जाएंगे।
• योजना लागू होने के बाद डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वॉय और कुछ अन्य पदों पर भी नौकरियों को अवसर बनेंगे। फिलहाल इस योजना से देशभर के 20 हजार अस्पताल जोड़े जा रहे हैं।
• आयुष्मान भारत पोर्टल की पूरी जानकारी हासिल करनी होगी। मरीजों को लाभ देने के लिए तैयार हो रहे सॉफ्टवेयर पर काम करना होगा।
• क्यूआर कोड के अनुसार लाभार्थी के पहचान पत्र की सत्यता भी जांचनी होगी। जिस अस्पताल में मरीज का इलाज होना है उसे इसकी जानकारी देनी होगी। मरीज डिस्चार्ज होने के बाद इसकी जानकारी स्टेट एजेंसी को देनी होगी।

9. प्रतिरक्षी प्रोटीन से कम होता है मलेरिया का खतरा
• प्रतिरक्षी प्रोटीन के उच्च स्तर के साथ जन्मे बच्चे अपने जीवन के शुरुआती वर्षो में मलेरिया से बचे रहते हैं।
• ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार जिन बच्चों की नाभिरज्जु के रक्त में साइटोकिन आइएल-12 नामक प्रोटीन ज्यादा मात्र में होता है उन्हें दो साल की उम्र तक मलेरिया नहीं हो सकता।
• दुनिया में हर साल मलेरिया से करीब पांच लाख बच्चों की मौत हो जाती है। बच्चों में इस प्रोटीन के विकास का कारण बताते हुए वैज्ञानिकों ने कहा, ‘यह केवल मां और उसके पेट में पल रहे बच्चे की जेनेटिक भिन्नता पर निर्भर नहीं करता।
• गर्भावस्था के दौरान मां का प्रतिरक्षा तंत्र जितना मजबूत होगा बच्चे में प्रोटीन की मात्र उतनी ही बढ़ेगी।’
• वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में इस प्रोटीन का इस्तेमाल कर मलेरिया रोधी टीका विकसित किया जा सकता है।