दैनिक समसामयिकी 29 जुलाई 2018

दैनिक समसामयिकी 29 July 2018(Sunday)

1.आधार समेत कई कानूनों में करना होगा फेरबदल
• लोगों के निजी डाटा की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित डाटा प्रोटेक्शन कानून के निर्बाध अमल के लिए सरकार को आधार समेत कई अन्य कानून व नियमों में बदलाव करना होगा। डाटा प्रोटेक्शन कानून का खाका देने वाली जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा समिति ने ऐसे करीब 50 नियमों की पहचान की है। इनका दोहराव प्रस्तावित नए कानून की विभिन्न धाराओं से होगा। समिति का मानना है कि इन बदलावों के बाद ही डाटा प्रोटेक्शन कानून पर पूर्ण अमल संभव हो सकेगा।
• समिति ने डाटा प्रोटेक्शन पर सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में आधार कानून में दो संशोधन सुझाए हैं। पहला लोगों के निजता के अधिकार को और संबल देगा। इसके तहत लोगों के डाटा की प्रोसेसिंग की प्रक्रिया को जरूरत के आधार पर दो वर्गो में बांटने का सुझाव दिया गया है। एक, ऑथेंटिकेशन के अनुरोध से संबंधित और दूसरा, ऑफलाइन रहते हुए किसी व्यक्ति की पहचान के मूल्यांकन के लिए।
• इसके अतिरिक्त समिति ने दूसरा संशोधन आधार की मूल संस्था यूआइडीएआइ की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के संबंध में सुझाया है। देश में अब तक 121 करोड़ लोगों को आधार नंबर जारी किया जा चुका है। केंद्र व राज्य सरकारें कई तरह के लाभ देने के लिए आधार नंबर के जरिए लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करती हैं।
• आधार को पहचान की तरह इस्तेमाल करने के लिए एक रेगुलेटरी सिस्टम की आवश्यकता है। इसके लिए दो बदलाव करने होंगे। पहला यूआइडीएआइ को संचालन के लिए निर्णय लेने में स्वायत्त बनाना होगा। दूसरे उसे ऐसे अधिकार प्रदान करने होंगे जो परंपरागत रूप से नियामकों को उपलब्ध हैं।
• आधार के अतिरिक्त समिति ने कुछ अन्य कानूनों में भी संशोधन का सुझाव दिया है। आरटीआइ एक्ट के तहत लोगों के डाटा को सार्वजनिक करने वाले नियम को समिति ने और अधिक पारदर्शी बनाने का सुझाव दिया है। इसके अतिरिक्त डाटा प्रोटेक्शन कानून अमल में आने के बाद समिति ने आइटी एक्ट की धारा 43ए को भी हटाने का सुझाव दिया है।
• श्रीकृष्णा समिति ने ऐसे 50 नियमों की पहचान भी की है जो प्रस्तावित डाटा प्रोटेक्शन नियम के अमल में आने के बाद गैर जरूरी हो जाएंगे। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिन मंत्रलयों के अंतर्गत ये नियम आते हैं उन्हें पहले ही आवश्यक कदम उठाने होंगे। श्रीकृष्णा समिति ने डाटा चोरी पर बेहद सख्त सिफारिशें की हैं।
• इनमें 15 करोड़ रुपये तक का जळ्र्माना शामिल है। या फिर डाटा एकत्र करने वाली कंपनी के वैश्विक टर्नओवर का चार फीसद तक जुरमाना लगाया जा सकता है। श्रीकृष्णा समिति ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिस पर अंतर मंत्रलयी स्तर पर विचार किया जाएगा।

2. पुतिन से मुलाकात के लिए रूस जाएंगे ट्रंप
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस दौरे के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंतण्रको स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।
• व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने जारी बयान में कहा, राष्ट्रपति ट्रंप वाशिंगटन में पुतिन के दौरे को लेकर आशान्वित हैं और साथ ही वह पुतिन के निमंतण्रपर रूस जाने के लिए भी तैयार हैं।
• पुतिन ने शुक्रवार को कहा था कि वह मॉस्को में ट्रंप के साथ मुलाकात के इच्छुक हैं। पुतिन ने कहा, हम इस तरह की मुलाकातों के लिए तैयार हैं। हम राष्ट्रपति ट्रंप को मॉस्को बुलाने के लिए तैयार हैं। उन्हें पहले ही इसके बारे में बता दिया गया है। उधर, तालिबान की पहली बार सीधे तौर पर अमेरिकी अधिकारी के साथ प्रारंभिक बातचीत हुई।
• अफगानिस्तान को लेकर आने वाले समय में शांति वार्ता को लेकर र्चचा हुई। आतंकी समूह के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने यह जानकारी दी।

3. भारत और नेपाल के थिंक टैंक पहली बार विचारों का आदान-प्रदान करेंगे
• भारत और नेपाल के थिंक टैंक पहली बार एक-दूसरे से विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। ‘नेपाल-भारत थिंक टैंक समिट’ का पहला आयोजन काठमांडू में मंगलवार से होगा। इसका उद्घाटन भाषण नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री एवं कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के को-चेयरमैन पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ करेंगे।
• एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ डिप्लोमेसी एंड इंटरनेशनल अफेयर्स (एआईडीए) और नेहरू मेमोरियल म्यूजियम लाइब्रेरी की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित समिट में भाजपा महासचिव राम माधव मुख्य भाषण देंगे।
• एआईडीए के सीईओ सुनील केसी ने कहा कि नेपाल ने दोनों देशों के थिंक टैंक्स के बीच अधिक सहयोग और ज्ञान की जरूरत को समझा है। क्योंकि इस क्षेत्र में नीति निर्माताओं और थिंक टैंक्स के बीच काफी दूरी है।

4. न्यूजीलैंड की संसद ने घरेलू हिंसा पीड़ित को 10 दिन की पेड लीव की मंजूरी दी, ऐसा करने वाला पहला देश बना
• न्यूजीलैंड में घरेलू हिंसा पीड़तों को 10 दिन की पेड लीव मिल सकेगी। इस विशेष लीव की मांग वाले डोमेस्टिक वॉयलेंस विक्टिम प्रोटेक्शन बिल को संसद ने मंजूरी दे दी है। इसी के साथ न्यूजीलैंड दुनिया का ऐसा पहला देश बन गया है, जिसने घरेलू अत्याचारों से पीड़ित को रिकवरी के लिए पेड लीव का हक दिया है।
• बिल के तहत पीड़ितों को ये पैड लीव बीमारी या मिलने वाली अन्य छुटि्टयों के अतिरिक्त मिलेगी। हालांकि ये लाभ उन्हें नहीं मिलेगा, जो घरेलू हिंसा से दूर हैं। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिनमें सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा की घटनाएं होती हंै।
• न्यूजीलैंड में करीब एक लाख 5 हजार घरेलू हिंसा से जुड़े मामले हर साल दर्ज होते हैं। पुलिस को हर चार मिनट में घरेलू हिंसा की एक शिकायत की जाती है, जबकि 76 फीसदी मामलों में तो रिपोर्ट ही दर्ज नहीं कराई जाती है। इस कानून से देश के 40 फीसदी परिवारों की को फायदा मिलने की उम्मीद है, जो कामकाजी हैं और घरेलू अत्याचार सहते हैं।
• प्रोटेक्शन बिल लाने वाली ग्रीन पार्टी की सांसद जैन लोगी राजनीति में आने से पहले घरेलू हिंसा का शिकार महिलाओं को शरण देने और उनके हक के लिए सात साल से काम कर रही हैं। सांसद बनने के बाद उन्होंने इसी मसले पर कानून बनाने की पहल की। उनके बिल को देश की संसद ने 57 के मुकाबले 63 मतों से पास कर दिया।
• खास बात ये है कि जैन के इस बिल को पास कराने में न्यूजीलैंड नेशनल पार्टी ने समर्थन नहीं दिया है। एक अनुमान के मुताबिक घरेलू हिंसा के कारण न्यूजीलैंड को हर साल 48 हजार करोड़ का नुकसान होता है।

5. एमएसएमई की परिभाषा बदलेगी सरकार, सालाना टर्नओवर के आधार पर तय होगी श्रेणी; 20 लाख उद्यमियों को होगा फायदा
• केंद्र सरकार ने माइक्रो, स्मॉल एवं मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) की परिभाषा में बदलाव करने जा रही है। अभी तक प्लांट एवं मशीनरी में निवेश के आधार पर उद्यमियों की श्रेणी तय होती रही है। पर बदलाव के बाद श्रेणी उनके सालाना टर्नओवर (कारोबार) के आधार पर तय होगी।
• सरकार ने इससे संबंधित बिल संसद के चालू सत्र में पेश किया है। नई परिभाषा से 20 लाख से ज्यादा मॉडर्न उद्यमियों को फायदा होगा। वहीं, नए उद्यमी भी एमएसएमई होने का फायदा उठा सकेंगे।
• एमएसएमई मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि मॉडर्न उद्यमी प्लांट एवं मशीनरी में ज्यादा निवेश करते हैं। इस कारण टर्नओवर कम होने के बावजूद वे छोटे उद्यमियों की श्रेणी से बाहर हो जाते हैं। उन्हें सरकार की तरफ से छोटे उद्यमियों को दिए जाने वाले लाभ नहीं मिल पाते।
• वहीं छोटे उद्योगों में शामिल लगभग 20 हजार यूनिट इस श्रेणी से बाहर हो जाएंगी क्योंकि प्लांट एवं मशीनरी में उनका निवेश कम है, लेकिन उनका टर्नओवर ज्यादा हो चुका है। इन उद्यमियों को छोटे उद्योग के नाम पर फायदे बंद हो जाएंगे। एमएसएमई मंत्रालय के मुताबिक लगभग 2 करोड़ उद्यमियों को मंत्रालय की तरफ से उद्योग आधार नंबर दिया गया है।
• फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज के महासचिव अनिल भारद्वाज कहते हैं, टर्नओवर के आधार पर श्रेणी तय होने से पारदर्शिता आएगी।
• एसएमई क्षेत्र के सलाहकार देबाशीष बताते हैं कि अभी कई बड़े उद्योग सरकारी खरीद में हिस्सा लेने के लिए यूनिट डालकर उसे एमएसएमई श्रेणी में दिखा देते हैं। नए बिल से यह धांधली खत्म हो जाएगी। छोटे उद्यमियों को इस श्रेणी में बने रहने के लिए हर साल सीए से या कोर्ट से प्लांट/मशीनरी में निवेश का सर्टिफिकेट देना होता है, ये सब बंद हो जाएगा।
• जेम्स-ज्वैलरी या पान मसाला क्षेत्र में प्लांट/मशीनरी में कम निवेश होता है, पर कारोबार 400-500 करोड़ का होता है। फिर भी ये एसएमई बने रहते हैं। नई परिभाषा के लागू होने के बाद यह खत्म हो जाएगा।